देश दर्शन -सितम्बर 1944 | Desh Darshan -Sept.1944

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
69
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)बलुआ पत्थर है । ऊपरी रीवां शिलाओं में विशाल बलुआ
पत्थर है जो कमूर पहाड़ियों में दिखाई देता है | ऊपरी विन्ध्या
की ऊपरी भाणेर शिलायें ६५० फुट मोटी हैं। निम्न भाणेर
१४५० फुट मोटी है। ऊपरी रीवां शिलायें १००० फुट
मोटी हैं । क्
निम्न विन्ध्या शिलायें ऊपरी विन्ध्या शिलाओं के नीचे हैं ।
यह जिले के उत्तरी-पूर्बी भाग में पाई जाती है । कटनी से कुछ
दूर दक्षिण पश्चिम की ओर प्रस्तर श्रंश होने से निम्न विन्ध्या
शिलायें लुप्त हो जाती हैं । इसी प्रश्तर श्रंश से- रीवा ।ओर মাহ
वार शिलायें एक दूसरे से मिल गई हैं। निम्न विन्ध्या शिलाओं
के अवस्थायें हैं । रोहतास अवस्था में चूने का पत्थर पाया जाता
है । यह चूने का पत्थर कटनी के पास निकाला जाता है।इस
लिये इसे कटनी का चूने का पत्थर कहते हैं। खें जुआ अवस्था
जिले के उत्तरी-पूर्वी कोने पर खेजुआ श्रेणी के पास पाई जाती है
इसमें शेल ओर बलुआ। पत्थर हे । खेंजुआ में चूने के पत्थर की
पेटी है । चीनी मिट्टी जिले के उत्तरी-पूर्वी कोने पर बाढ़ी से
अमरपुर तक ११ मील तक चली गई है। इसको दूसरी पेटी ४
मील उत्तर की ओर है। चीनी मिट्टी का रंग कहीं फीका और
पीला कहीं कुछ काला है ।,इसको उत्पत्ति ज्वालामुखी से हुई है ।
इससे १ हुई बासाल अवस्था है । इसमें बलुआ ओर मिश्रित
पत्थर है ।धारवार | পি...1धारवार शिलायें जिले के मध्यवर्ती भाग में पाई जाती हैं ।
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