दिनकर के काव्य में क्रांतिमंत चेतना | Dinkar Ke Kavya Me Krantimant Chetana

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Dinkar Ke Kavya Me Krantimant Chetana  by निधि भार्गव - Nidhi Bhargav

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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की आखें, हारे का हरिनाम मृत्ति तिलक बुम्क्षेत्र, रश्मिरथी, उवशी। काव्य रूपात्मक प्रयोग स्वातत्य--बवुरुक्षेत्र रश्मिस्यी उवश्ञी आदि। भापात्मव' सरचना কা स्वरूप --तनमव भौर देगज शब्दा का प्रयोग , तपम गदो का प्रयोग विदेशी गत प्रयाग--उट्‌ शब्नवनी, मग्रेजी श~लवती, यजना का प्रयोग | शिल्प सरचना के अ-य तत्व--अलवार- याजन मूमनी मवस्तुत योजना व्यतिरेक অলক पयायोषिन अलकार अपति अलकार उल्लेख अलकार, अतिश्योक्ति अलकार, आरि । छद योजना म प्रयोगगीलता जादि । निष्पप | उपसहार ৮7155 अध्ययन के निष्क्प, उपलधिया और सम्मावनाएं ग्रवानुकप्रणिका १५१-१५४




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