सुन्दर ग्रंथावली भाग 2 | Sundar Granthawali Vol. 2

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
शेयर जरूर करें
Sundar Granthawali Vol. 2 by सुन्दरदास जी -Sundardas Jiहरिनारायण वर्मा -Harinarayan varma

एक विचार :

एक विचार :

लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :

सुन्दरदास जी -Sundardas Ji

सुन्दरदास जी -Sundardas Ji के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |

हरिनारायण वर्मा -Harinarayan varma

हरिनारायण वर्मा -Harinarayan varma के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(देखने के लिए क्लिक करें | click to expand)
( ११ )पद द १५--राग सिधूडोः--( १) दादू सूर सुभद दृ धंभण (२) सोई सुर बौर स्राव॑ंत्त सिरोमनि (३) द्र दट आई जुडे धरणी पर( ४ ) तडफड़े सूर नीसान घाई पड( ^ ) महा सुर तिन कौ जस गाद--राग सोरटः-(१) एसो तं जुम कियो गढ़ घेरी (२) भाजं कादर भिडि भारथ साम्दौ (३ ) सोई गाढरे रण रावत वांको ( ४ ) जो कोई सुने गुरु की बानी( £ ) मेरा मन राम सो छागा( ६ ) ऐसी योग युगति जब होई( ७ ) हमार साहु रमइया मोटा(८ ) देखह साह रमइया ऐसा(६ ) मोहि सतगुरु कहि समुमाया हो ( १० ) मेरे सतगुरु बड़े सयाने हो( ११ ) उस सतगुरु की बलिहारी हो . (१२ ) सोई संत भल्ता मोहि छागे हो ( १३ ) वें संत सकट सुखदाता हो( १४) भाई रे सतगुर कदि समुकाया ( १९ ) भाई रे प्रगल्या ज्ञान उज्ञाला( १६ ) सब कोऊ भूलि रहे इहिं बाजी




User Reviews

अभी इस पुस्तक का कोई भी Review उपलब्ध नहीं है | कृपया अपना Review दें |

अपना Review देने के लिए लॉग इन करें |
आप फेसबुक, गूगल प्लस अथवा ट्विटर के साथ लॉग इन कर सकते हैं | लॉग इन करने के लिए निम्न में से किसी भी आइकॉन पर क्लिक करें :