वेदान्तदर्शनम | Vedantdarshnayam

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Vedantdarshnayam by खेमराज श्री कृष्णदास - Khemraj Shri Krishnadas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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- बैदान्तदर्शनक़े अधिकरणोंका सूचीपतर । प्रतिपाद्यविषय, अधिकरणसंख्याद्दित । अधि० २ अतीकर्मे अध्यास न करनेके निरुपणमें अधि० ३ कमीडुः उद्बीथादिमें आदित्यआदे मति करनेके बर्णनमें अधि० ४ उपासनामें आसन नियत होनेके वर्णनमें आधि० ५ मरणपरय्यनत उपासनाके अभ्यास विषयमें आधे० ६ ज्ञानीके पाप नाश होने व. फिर उसका योग न होनेके वर्णनमें अधि० ७ -यापके समान पुण्यकाभी मेर न होनेके वर्णनमें अधि० ८ सख्वितकम मात्र ज्ञानीके बिना भोग क्षीण होने व आरब्ध कर्म भोगेहीसे क्षीण हेोनेके वर्णनमें अधि० ९ आगिहोत्रआदि कर्मका अछ्लेष न होने व अनुष्ठानके योग्य होनेके वर्णनमें आधै० १० सूत्रसख्या: | | कि.सू.-कि.स. अपने आत्माहीमें अभाव करनेके ' .विषयमें ३- ० ४- ५ ६- ० ७-११ १२ ० १४- ° ९५- ० १६-१५ इति चतुर्थाध्यायस्य प्रथमःपादः । अथ चतुथौध्यायस्य द्वितीयःपादः । बाणीका मनम प्राप्त होने वा लीन होनेके वर्णनमें अधि० ९ मनकी সান সাদি होनेके वर्णनमें अधि० २ आण तेजमें प्राप्त होनेके वर्णनमें अधि० ३ तेनआदि सब भूतोंसहित जीवके गमन वर्णनमें अधि० ও ज्ञानी व अज्ञानीकी उत्कान्तिमात्र एकसम होनेके वर्भनमें अधि० ५ इदधिय व प्राणका परमात्मामें रय होनेके बणेनमे अधि० ६ ५ विभाग व्यवहारके योग्य न होनेरूप छूयके वणनमें अधि० ७ उपासककी उत्कान्तिमें विशेषता वर्णनमें अधि० ८ रहिम अनुसार विद्वानके गमनके वर्णन मधि° ९ <~ रे ३- ७ पु... > ५- ६ ७3-१३ १ ६- ० १ ৬.৮ ७ ११ पृष्ठक्तरुपा: कि.पू.-कि.प. ७५६१-५६ ३ ५६३-५६४ ५६४- ५६७५ ७५६०-०६ ६ ७५६६-५६७ ५३७-०६९ ५द९- ० ०६९-०७० ५७०-५७३ ५५७३ -५७४ ५७४-५७५्‌ ५.७५- ७६ ५७६-७०७७ ७७७--५८५ ७५६८६-- ° ५८६- ० ५८७-५८८ 4९८ ८-५८९




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