जैनतत्वादर्श उत्तरार्ध भाग - 1 | Jaintatvadarsh Uttaradh Bhag 1

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Jaintatvadarsh Uttaradh Bhag 1 by आत्माराम जी महाराज - Aatnaram Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(१२) चिप्य श्री जितनाथ मीर सगर चक्तव्र्ती श्री सभवनाय श्री ममिनद्‌न नाध, श्वी सुमतिनाथ, घो पद्मप्रम, थी सुपाश्येनाथ, श्री चन्ठप्रमु, थी सुतिवित्राय मिथ्यादष्टि ब्राह्मण श्री शीतलनाथ और दरिविय की उत्पत्ति श्री भ्रयासनाथ और भिपृ० याछुवेय श्री घासुपूज्यनाथ, भ्री विमलनाय, श्री अनतनाथ श्री धर्मनाथ, श्री शातिनाथ, भरी कुन्थुनाथ, श्री रनाय सुभूमचक्रयर्ती और परशुराम श्री महिनाथ, श्री सुनिखुव्रतनाय पि मुनि तथा नयुचिषल रापण और डस के दशा मुफ्त श्री नमिनाथ, थी नेमिनाथ श्री कृष्ण और यल्भद्र श्री पाणयैनाय मौर श्वी महावीर द्वाद परिच्छेद श्री महावीर के गणधरादि ४११ ९१३ ४१५ ४१५ ४१६ ४२० ४२१ ४२२ ४३३ ४३८




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