मोक्षमाला | Moksh Mala

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
179
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)अनायी ঘুনি মান ৭. ९
ययोः अने. षीरयो हं अनेक प्रकारना अश्वनो भोगी एड; अ-
नेकमरकारना मदोन्मत्त हायीजोनो धणी छर; अनेक परकारनी
सैन्या मने आधीन छे; नगर, ग्राम, अंतःपुर अने षरुष्पादनी
भरे कंर न्यूनता नयी; मतुष्य संबंधी सघा मकारना भोग
हूं पाम्यों छठं। अनुचरों पारी आज्ञाने रुढी सीते आरापे छ; एम
राजाने छाजती से प्रकारनी संपाचि मारे घेरछे। अनेक मनवांछित
पस्तुओं मारी समीपे रहेछे. आदो हं महान् छतां अनाय केप
होठ ! रखे है भगवन् , तमे मपा बोलता हो ! मुनिए कह्यु, रा-
जा। म्ारु कहेदुं तुं न््यायपू्वेक समज्यों नयी- हवे हुं जेम अनाथ
थयो; अने जेम में संसार याम्यो तेम तने कुं छठ ते एकाग्र
अने साषधान वित्तथी-सांभठ; सांभखीने पी तारी शंकानो
सत्यासत्य निर्णेय करने.
कौशांबी नामे अति जींण॑ अने विविध प्रकारनी भव्यताथी
भरेली एक छुंदर नगरी छे; लां रीद्धिपी परिपृणे पन्संचय
नामनो मारो पिता रेतो हतो. हे महाराजा ! योवन वयना
प्रथम भागमां पारी आंखों अति वेदनाथी घेराइ; आखे शरीरे
अप यठ्या मंद्यो. शस्रयी पण आतिशय तीक्ष्ण ते रोग बैरी-
नी पेठे मारापर कोप्रायमान थयो. मारुं मस्तक ते आंखनी
असष्वेदनायी दुःखदा छाग्युं, वद्चना प्रहार जेवी, बीजा
ने-पण रौद्रभय उपजावनारी एवी ते दारुण देदनायी हं अ-
त्यंव शोकमां एतो. संख्यावंध वैयक्शाख्निपूण बैयराजा मारी
ते वेद्नानो नाद करवाने पाटे आस्या अने तेमणे अनेक ओषध
उपचार करा पण ते या गया. ए महा निपूण गणाना वैपरानो
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