रवि ठाकर री वातां | Ravi Thakar Ri Vatan

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
शेयर जरूर करें
Ravi Thakar Ri Vatan by रवीन्द्रनाथ ठाकुर - Ravindranath Thakur

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

रवीन्द्रनाथ ठाकुर - Ravindranath Thakur के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(देखने के लिए क्लिक करें | click to expand)
आषी रा प्रपप्ता में ७মী হয়া बात ने झतरा सूघा पणा सू कही जांणे वा एक प्रकल री सल्ला देय री र्है । षोई स्याग कररी ब्दे के बोई बड़ापणों जताय रो *्है एडी बोई वात वोरो भावता ने भीटी ई नो ही ।अये धोसरो हो म्हारे सुझबदा रो । पण ग्हारा में बसी मुसय्क मुझकदा री सगती कटै? महू तो उपन्यास रा छाम साथ ज्यू' आरबापणा सू' ऊंचा साद में ओलियो जव लग घट में सास . ' वी दीचे ई मर्ह्वारी बात वाट दीधी, विस, बस रवादो, बोल्या जोई धणं पारो दातो खुण न सो गहारो मरजावां रो जीव करे ॥'म तुरता हार मानवात्राब्यों नो हो, 'ई जमारा में तो गोई दृझों ने प्रीत करणो पावे नींसुण ने म्हाती धण जोर মু हेस दीघों। गहने बोलतां ने ह३णों पश्ियों ।बजाणां वो दिनो म्हूं मत में मानतों के नीं परा घबे महू मार । उ री भाषों धोहवा री झयस नों रो णो सेदा चात रो बप्ता, गहने ध्वरेलो दोखदा जागंगियो, बाप-बावरी शरवा रो रहें धाव्खखो कदी नी सीपो, ए८ ऋ्ाणों जमारौ मोदा श माषा री ईद भने बद्वा रे विचार बाछाजा में बांटा ज्यू हालतो । चढ़ता ओोबत में ण्दी महू. प्रागली छाडी ने सात्णतों हो म्हारी जिशगी रहने डेशट करता पूलश जेड़ी लागती जि घांयतू सुगंध रो शंगरां फूट रो हैरी ॥ ৰ দলে দাবী भियो प्रपाम्‌, विना रा री মক্ষমীম উন্বীলানী। रहारी शादी रे नोजे छुक्योश दबला ने दीं देस लोघों दौखतो॥ रू रहते नों समभियों प्रण दीं रहते समझ सोधो ॥ जिसे सिप्योटा ऋखर नमीं ब्हे, एशो टाबरा हो पेती दोदी रो नाई दी एहते शंब सीधघो॥ रह म्हारा उपयास शा साहा से লা ধিত্রা एदवां सागतों तो वा एड़ी गेही श्लोत सू , कोतर थूं सुछवत्ती के सहागा सू हाल बूदारों भों तिकण्णों॥ म्हाया हिवशा मायली बात ने, জিন মু নী আলী যা শামী ही माई जाण णदत्री ॥ वे दाठां छोड़ गने सोवा धरतो बटार प्रेर मे भरदादा रो मंतर बरेযাঁকতে হোল হী আন্ত হাহা হাট ঘট হনে আমহাস নুলহী হতো थोडा दिनि श्ण “7 „ / दल दांरों बेटी হী মানু যা লহपिछश बराय दोपी। 7 3 शा बरस एनराछ रो॥ তরে कंडडा हा हे शोत दिद्ाइ नो बोरो॥ 481 61% जेशे इटसे তি কটা আল ই, বলা রস कं




User Reviews

अभी इस पुस्तक का कोई भी Review उपलब्ध नहीं है | कृपया अपना Review दें |

अपना Review देने के लिए लॉग इन करें |
आप फेसबुक, गूगल प्लस अथवा ट्विटर के साथ लॉग इन कर सकते हैं | लॉग इन करने के लिए निम्न में से किसी भी आइकॉन पर क्लिक करें :