श्री भगवत दर्शन [खंड - 52] | Shri Bhagwat Darshan [ Khand - 52 ]
श्रेणी : साहित्य / Literature
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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
247
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१२ भागवती कथा, खणड ५२पूछने में सकुचाती हू, दमारे दी द्वारा प्रश्न पुछनाती ই 19
डुबौसा मुनि बोले--/अच्छा, तुम ही पूछो। क्या इसका
গহন হু?” ১ ক
यद् सुनकर वही कुमार बोला -“महाराज ! यह गर्भवती ইঃ
अभी शीघ्र ही १० । ६ दिन में इसका प्रसव दोने वाला दे, चद्
चाहती हू मेर पुत्र हो । आप लोग तो निरालब्न दें ओर अमोघ--
दर्शन हैं । यह” बतावे कि इसके पुत्र होगा या पुत्री ” कथ
प्रसब होगा 7? हि ^ पक
यह सुनकर जितने कुमार थे, सभी को हसी आ गयी, बे मुँह
परकर हँसने लगे । चनायटी बात को तो कोई व्यवहार पढ़ पुरुष
भी समभ सकता हे, सो वे सर्वज्ञ मुनि थे। कुमारा की धृत्तता-
को वे समभ गये, उन्हें उनकी इस बृष्दता पर नोध आ गया।
अवितव्यता ऊी प्रेरणा थी, भगवान् की इच्छा थी, विधि का ऐसा
ही विधान था। जितेन्द्रिय और मतपरायण मुनियो को भी क्षोभ
हुआ ने सोचन लगे--“भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र पीज होकर भी
ये इतने धृष्ट ओर अबिनीत हैं, इन्हें इनकी अविनय का फ्ल
चखाना चाहिए। भावीवश सभी ऋषियों के मन्त से यही बात बेठ
गयी । डुबोसा मुनि तो ध की मूरति ही ये । वे सूखी हँसी हँसते
हुए कहने लगे--“वेटाओ | यह घूँघट बाली बहू न ইভা जनेगी
ने बेदा 1 ऐसी वस्तु जनेगी, जिससे तुम्हारे सम्पूर्ण कुल का नाश
होगा। अर, धर्तों ! जिस छोकरे को तुमने छोकरी वना रस्या है,
उसी के पेट से ऐसा मूसल निकलेगा कि उसी से तुम सयके सन
इस लोक की लीला समाप्त कर जाओगे [7
महांमुनि दुर्बासा के शाप का सभी न॑ साधु-साधु कदकर अलु-
मोदन सिया । यटुङ्कुमार सी उिनोद सब भूल गये। उनके मुख
फफ पड गय | ये सयके सब मारे डरके थर-बर कॉपने लगे।
किसी का भी साहस न हुआ कि मुनिग्रो से कुय कद्द सरके त्रे तुरत
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