संत कवि आचार्य श्री जयमल व्यक्तित्व और कृतित्व | Sant Kavi Acharya Shri Jaymal Vaykitatvy Aur Krtitatvy

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Sant Kavi Acharya Shri Jaymal Vaykitatvy Aur Krtitatvy by उषा बाफना -Usha Bafna

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( १६ ) रस ७४, वीर रस ७५ रोद्र रस ७६, करुण रस ७६, हास्य रस ७७। प्रकीर्णक रचनाएँ ७८-८१, कला विधान ८१, भाषा ८२, शब्द प्रयोग ८३, पारिभापिक शब्दावली ८५, मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ ८5६, अलकार ६०, शैलीविधान ६७, छन्द विधान १००। चतुथं अध्याय গু ४--दार्शनिक विचारधारा १०५ ११५ आत्मा १०६, परमात्मा १०६, जगत १०७, साधना १०६, पुनर्जन्म एवं कमंवाद ११२, मुक्ति ११४। पचम अध्याय छ ५--सॉस्कृतिक अध्ययन ११६ पारिवारिक जीवन चित्रण परिवार का गठन एवं विभिन्न सम्बन्ध १२०, शिष्टाचार १२१, सस्कार- गर्भाधान एवं जन्मोत्सव १२१, नामकरण १२२, विवाह १२३, दहेज १२३, मृत्यु १२४, सामाजिक जीवन चित्रण-मनो विनोद के साधन १२५, सामाजिक व्यवस्था १२५, पर्बोत्सव १२५, त्योहार १२५, विश्वास एव मान्यताएं १२६, विविध व्यवसायी १२६, सामान्य जीवन चित्रण-आवास १२७, खान-पान १२७, श्य गार के साधन १२८, राजनीतिक जीवन चिवण १२८) परिक्िष्ट--१ १३१ (क) अस्बड सन्यासी की ढाल १३२३-१४०, (ख) मृगा लोढा की ढाल १४१-१६१ । परिशिष्द--२ १६३-१६४ सहायक ग्रन्थो की सूची १६३-१६४ | शुद्धिपत्र १६५




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