हरिऔध सतसई भाग 2 | Hariaudh Satasai Vol-ii
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
139
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)हरिओओोध-सतसईउसकी सकल विभूति को,
देखें आँख ঘজাহ।
भूले भी संसार को,
कहें न हम निस्सार ।श्राखें है पथरा गयीं ,पढ़ पढ़ नाना म्॑थ।
जिससे प्रभु का प्राप्ति हो ,
मिला नहीं वह पंथ।कान कान वह है नहीं ,
है वह काठ समान |
जो सुन पाता है नहीं,
गौरवमय गुणगान ।पड़ प्रपंच में में नहीं।
बनू पाप से पीन।
मेरे मन को मथ सके ,
मन्मथ प्रभो कभी ন।मानस बनता ही रहे ,पृत कृत्य का क्षेत्र
प्रभु पद पंकज के बनें,
चं चरीक ममनेत्र ।कलप रहा हूँ ओर हूँ ,
अतिशय दुबेल दीन।
विनय कान करते नहीं ,
क्या हो कान विहीन
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