न्यूबाला | Newbala

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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न्यूबाला ( १६ ) ऐसा उसको ! लगा शौक, जो कमी नदीं दने वाल्ला । सहपाठी मिल गया हाथ, भट उसकी पाकिट में डाला ॥ छीन लिया जो कुछ भी निकला, यही मिला 'सह-शिक्षा' में । बैठ चांदनी चौक मित्र संग, चाट उड़ाती न्यूबाला ॥ ( २० ) बड़ी लाइली मात पिता की, जो चाहा ! सो कर डालां। वोलो तुम ही रहा कोन फिर, उसके मुँह लगने वाला ॥ इसकी कहते हैं! आजादी, व्याह न अपना करती है। कौन १ वंधे-बन्धन में, फिरती गर्भ गिराती न्यूबाला ॥ [ पन्द्रह- ]




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