द्रव्य और करन्सी | Dravya Aur Karansi

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Dravya Aur Karansi by कान्तानाथ गर्ग - Kantanath Garg

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श्र, द्रव्य और करन्ही गौण कार्य निम्नांकित हैं :--- ( १) मूल्य संचन, ( 9:07 0६ ए५1७८ ), (२) मूल्य हस्तांतरण ( 11167 0६ ए७७० ), (३ ) व्याक्षेषिक भुगतानों ক্যা प्रमाण ( 5127274 {07 29651:9৭ 02710750059) ये कार्य प्रधान कायों के ऊपर ही निर्भर हैं | यह बात तो हम सभी जानते है कि हम वस्त॒ुओ्नों की अपेक्षाकृत द्वव्य में अधिक सुविधा से मूल्य संचन कर सकते हैं। श्रम और सेवायें तो विल्कुल भी संचित नहीं की जा सकतीं । बात यह है कि यदि हम एक पल के लिये भी काम न करें तो यह श्रम अथवा सेवा सदा के लिये समाप्त हो जाती है। उपयोग की साधारण वस्तुर्यें मी धिक दिनों तक संचित नदीं रह सकतीं +, उनमें से कुछ तो समय पाकर और कुछ अन्य प्रकार से नष्ठ हो जाती हैं । मूल्य का हस्तांतरण मी द्रव्य, में बहुत आसानी से किया जा सकता है। इससे हमें बड़ी सहायता मिलती है | वस्तुओं का हस्तांतरण जैसा कि हम जानते हैं बहुत ही महँगा पढ़ता है और उसमें बहुत अपुविधा मी होती है। यदि द्रव्य न हो तो हमारी शिक्षा, हमारे खेल और हमारे आनन्ददायक सैर-सपाटे कुछ भी नहीं हो सकते । ` द्रव्य व्याक्षेपिक भुगतानों का प्रभाण भी है । इनके पूर होने के पहिले कुछ समय बीचना बहुत ही आवश्यक है। अतः यदि इस बीच मे चस्तश्रो का मूल्य घट-बढ़ जाता है तो या तो ऋणी अथवा ऋणदाता जैसा भी दहो कोई न कोई अवश्य हानि उठाता है । किन्तु यदि ये द्रव्य में व्यक्त होते हैं तो द्रव्य के मूल्य के श्रन्य वस्तुओं के मूल्य की अपेक्षाकृत कहीं अधिक स्थिर होने क कारण उपक हानि की सम्भावना कमं सँ कम हो जाती है । 'अब हम प्रासंगिक कार्यो की ओर आते हैं जिनका महत्व केबल आज- कल के आ्िक संगठन में ही है|




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