मेरे द्वार तरु नीम का | Mere Dwar Taru Neem Ka

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Add Infomation AboutRamesh Kumar Tripathi
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
7 MB
कुल पष्ठ :
208
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)पीले, रसीले, पके
चुए इसके ।
बटोरे हे गे,
खेल उनसे खेले है ।
इसकी सूखी सीको से
दाँत साफ किये है,
कान खुजलाये है
मीठे-मीठे सिहरकर ।
अपने पुरातन की कभी
शाखा को कटा देख,
दिल मे दर्द हुआ है ।
द्वार को शान
इसे समझा मेने ।
इस प्राचीन पादप के
कुछ ही पहले से
होता है इतिहास शुरू
मेरे विप्र-वश का,
छोटे-से गाँव मे ।
सग-सग पुरखे के
बीत गयी पोच पीटि्यो |
मेरे पुरखे
पले-बढे
तरुवर के ऑगन मे ।
फिर यही से उन्होने
शुरू की आखिरी
गगा-यात्रा अपनी |
साथ निभायेगा क्या अन्त तक
अति परिय सखा यह
मेरे वशधरो का
वर्तमान ग्राम मे ?
६
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