पद्मापुराण समीक्षा पहला अध्याय | Padmapuran समीक्षा Pahela Adhyay

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पद्मपुराण समी(न) त०८८5 पिला अध्याय 1. ` १ | ৯ 313 रावण के ছু । ६पदुमपुराण के अनुसार रावणु के खब से पहिलले पुरुषा का नाम मेघबाहन था जिसके वश में एक राज़ा रक्ष हुआ जिसके बेटे का नाम राक्षस छुआ, उस द्वी से रा धस्त वश चला, एस वश मे एक राजा चिद्युतकेश छुआ जिसका चेटा छुकेश हुआ, सुरेश के तीन बेटे माली, छुमाली और माल्यवान हुए, खुमाली के পি বলা জী व्योमघिन्दु की कन्या फेकसी व्याही गई उस से रावण, कुम्भकरण और विभीपण यदं तीन पुत्र और चन्द्रनसा एकर वेरी वैद है, व्योमचिन्दु की दूसरी वेरी कौशिकी थौ আঁ ছিলনা জা জাতী বাহ जिससे वश्रवण॒ हुभा भीर छक्रा का लोकपाल द्वो फर कुचेर फहलाया |यादपीक रामायण में यद्द कथन इस प्रकार है कि प्रह्मा ने राक्षस बनाये, इस राक्षस वश में चिदयुनकेश हुआ, जिसका पुत्र सुकेश हुआ और खुकेशके तीन पुत्र माली छखुमाली और माल्यवान हुए, खुमाली की कन्या फेकशी तुणविन्दु फी कन्या के बेटे নিলা से व्यादी गई, जिससे रावण आदि तीन पुत्र और सूर्पनजा एक पुत्री हुई, इस दी घिश्रवा को भारहाज ऋषि की कन्या भी व्याद्दी गई थी जिससे चेश्रवण पुत्र हुआ जो लड्ढा का लोकपाल और कुबेर छुआ |' जैन महापुराण मेँ इन दोनो ग्रन्थों के धिर यह लिज़ा है कि राघण का पु-स्पा सदश्यग्रीव था जिसका बेटा सतम्रीच भा, सतश्रीव का बेटा पचासभ्रीध और उसका ইল্লা पुलस्त्य और उस पुलस्त्य फा बेटा रावण हुआ ( दो लैनश्रन्यों मँ इतने भासे कथन भद्‌ का आश्चर्य है ) ।राघणके पिता विश्वासे केकसीके व्यादकी बावत पदुमपुराण में तो यद् लिखाहै कि खुमाली का पुत्र रत्न॑प्रवा एक वन में विदा सिद्ध कर रहा था, फेकसी के पिता ने कैफसी को घदीं चन में सेज दिया कि तू धन में,जाकर रत्नभ्रवा की सेचा फर और उसको अपना पति चना, रज्नश्नवा ध्यान में वेठा था, फेफ्सी हाथ जोड़ कर उसके सामने जा खट्दी हुई, ध्यान समाप्त होने पर उसने फेफसी से पूछा 'कि,तू कोन है १केकसी मे अपने आने का कारण बताया; तब उसने वही केकसी को, व्याद्वी_!




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