स्वामी रामतीर्थ उनके सदुपदेश भाग - 28 | Swami Ramtirth Unake Sadupadesh Bhag - 28

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Swami Ramtirth Unake Sadupadesh Bhag - 28 by परमहंस रामतीर्थ - Paramhans Ramtirth

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about परमहंस रामतीर्थ - Paramhans Ramtirth

Add Infomation AboutParamhans Ramtirth

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
कुछ लोग पल हे जिनके लिए देशभक्ति का अथे म र बही-खातों पर ज्ञो कि अब व्यथं श कर रहे हैं ! সস होने वाले खुधारक युवक | तू भारतवर्ष की प्राचोन ফর ৬২ रीतियों और परमाथे निष्ठा शटी नन्दा मत कर । इस प्रकार विरोध का एक नया बोह बोदेने ले भारत बषे के मलुष्य एकता को प्राप्त नहीं ऋर छक्ेत । ८ হু तुच्छ टकार को त्याग कर ओर इस भकार द खमस्त रूप होकर आप कुछ भी मदछूल करा, ते आपका देश आपके साथ महसूस करेंगा। आप आगे बढ़ा, तः आप का देश आपके पीछे चलेगा । ३२ उन्नति का वायू मण्डल खबा आर प्रेम हेः हुक्म ओर मजबूरी नहीं, খালু सवा आर प्रेम से उन्नति होती दे विधि-निषेच मरी आज्ञाओ सल बह । २२ जो मनुष्य लोगों का बता बनने ह योग्य हात है, वह झपने सहायकों की मुखेता, आपने अलुगामेयां के হল শ্রী उवा दम পু एकौ श्रु धाद, भयल सा = ई হালা জাত জলা হন स ई & सद दनता की कभी शिकायत नदः कस्त) ३४ किस्म देश का वल छे विचार क वड ~ सं ˆ 4 ঠর্ टँ > त




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now