स्वामी रामतीर्थ उनके सदुपदेश भाग - 28 | Swami Ramtirth Unake Sadupadesh Bhag - 28
श्रेणी : जीवनी / Biography

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
20 MB
कुल पष्ठ :
130
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)कुछ लोग पल हे जिनके लिए देशभक्ति का अथे
मर
बही-खातों पर ज्ञो कि अब व्यथंशकर रहे हैं !সসहोने वाले खुधारक युवक | तू भारतवर्ष की प्राचोनফর ৬২रीतियों और परमाथे निष्ठा शटी नन्दा मत कर । इस प्रकार
विरोध का एक नया बोह बोदेने ले भारत बषे के मलुष्य
एकता को प्राप्त नहीं ऋर छक्ेत ।
८ হু
तुच्छ टकार को त्याग कर ओर इस भकार द
खमस्त रूप होकर आप कुछ भी मदछूल करा, ते आपका
देश आपके साथ महसूस करेंगा। आप आगे बढ़ा, तः
आप का देश आपके पीछे चलेगा ।
३२
उन्नति का वायू मण्डल खबा आर प्रेम हेः हुक्म ओर
मजबूरी नहीं, খালু सवा आर प्रेम से उन्नति होती दे
विधि-निषेच मरी आज्ञाओ सल बह ।
२२
जो मनुष्य लोगों का बता बनने ह योग्य हात है, वहझपने सहायकों की मुखेता, आपने अलुगामेयां के হলশ্রী
उवा दम পু एकौ श्रुधाद, भयल सा = ई হালা জাত জলা হন स ई & सद
दनता की कभी शिकायत नदः कस्त)
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