भूमिजा | Bhumija
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
143
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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हाय ! विराश्वित लोॉज रही है-
नारी अपने नर को।!दुःखों का उजियाला लेकर-
पथ रचती जाती है।
सेवा है, नर को सुख देकर-
खुद ठोकर खाती दै॥आँखों में है अध्य, साथ मै.
हवा तिराध्ित चलती !
दीपित है इस तरह मोम की-
बत्ती जैसे जलती |হন্রাজী में है पवन, पर्गों को-
प्रशा ने पकड़ा है।
घौर निराशा में प्राणों को-
पृथ्वी ने জন্ষভ্য ই?सत्य हुआ साकार या कि झ्िव-
ने यहं चित्र. बचाया |
सुन्दरता का फूल ননী के-
रोदन में मुसकाया |ও 1 ॥
छ
॥ ~
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