मनुस्मृति | Manusmriti

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न्छोक अदचारा ट्रिच्युतों विमः आचाराछमते द्यायुः आचार्य यम आचार्य च प्रवक्तारम्‌ आचाय पुत्र आचार्यश्र पिता चेतर आचायंस्त्स्य यां जातिमू ८० गे 0 आचार्य तु खलु प्रते आचार्यों के शः आचार्यों ब्रह्मणों मूर्ति आच्छाय चाचेयित्वा च आतुरामभिदम्तां वा परित्राणे आत्मनों यदि चान्ये पा म आत्मत्र दत्ता अत्नव हा त्पम साक्षी दीत न शूट्रापि रीताथ पड़ भागमू दिदीताथ पड़ भागम अदानमपियकरम .... आदाननियाचाद। तुः आदिष्टी नोदकं कुप व आय ब्रह्म आधद्ाद्यस्प गुण लेपाम आधि सीमा बाउघनम आधिश्रोपनिधिश्रो भी न्ट्े८ १८१४ १८. ४ ०५ ४०४ आयता पुरुषज्ञानम.... ३ | आपे घर्मोपदेशष च .... आषि गोमिथुन शुल्कम । आइत्तानों गुरुकुलात ३३ आश्रमादाश्रम गला आश्रमषु द्विजाती नाम स्ोकः पं ७ ५. | अप शुद्ध भूमिगता। २८१ आपत्करपेन यो धर्पम ५९१ आपदर्थ घने रक्षेत.... ३२६५ _ | आपडूतोइधवा छद्ध। ५४१९ . | आपो नारा इति प्रोक्ता १८४ आध्ा। सर्वेषु चरण... ३८४ | आमन्त्रितन्तु य। श्राद्धे १६१ आयर्ति सवकायाणाम ३५६ _ आययां ग़रणदोपन् ३५७ आयुप्मन्तें सुर सूत १८० आयुष्मान्मव सोम्येति ७९ भायुष्य भुद् ९१ | आयोगवश्च क्षता ५५३ आरप्यांश्व पशून्सरवान ५७४ | आरप्यानां च सघाम २५१ आरमेतेव कर्माणि .... ५४५ | आरम्भर्सचता5पेयमू ८६० | आतस्तु कुर्यारस्वस्थ सन्‌ ४२१ | आट्रपादस्तु भुअत २८५ रे | ऑधिक कुछमित्र च २४७ भ




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