रामायण - रहस्य [तीसरा भाग] | Ramayan Rahasya
श्रेणी : इतिहास / History
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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
113
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)॥ &% ]हैं। अर्थात् जब हृदय में वैराग्य रूप हनुमान प्रगटहोता है तो भोगों की इच्छा का त्याग होकर हृदय में:
द अनिच्छा शक्ति बढ़ जाती है । यही अनिच्छा ही वैराग्य-
की पूछ है और जब वैराग्य के प्रभाव से साधक का
हृदय इच्छा रहित ही रहने लगता है तो उसमें से मोह
को उत्पन्न करने वौली विषय-वासना आपसे आप ही क्षयः
हो जाया करती है। यही हनुमान द्वारा लंका दहन है।
जिसे रामायण में इस प्रकार लिखा है-चौ०-जारा नगर निमिष एक मांहीं ।
एक विभीषण कर गृह नाहीं ॥
उलट पलट लंका सब जारी।
कूदि परा पुनि सिन्धु मञ्चारी॥वेराग्य रुप हनुमान साधक को आठवाँ यह लाभ पहुं-
चाया करता है कि वह साधक को वृति को वहिमुख न
होने देकर उसकी वृति को अभ्यास में हो लगाकर अन्तमु ख
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