मैक्सिम गोर्की | Maiksim Gorki

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Maiksim Gorki by महेन्द्रचन्द्र राय - Mahendra Chandra Rai

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ७ ) यह केवल काशिरिन के घर की बात नहीं है, उन दिनों में काशिरिन जिस समाज में रहता था, वहाँ पर बरशंभता, नीचता, परस्पर का अविश्वास ओर नाना प्रकार से दूसरों को आघात करने की ओर उनकी क्षति करने की प्रव॒त्ति--ये सब्र सर्वव्यापक थे। पड़ोसी के कुत्ते को जहर देकर मार डालना, किसी की बिल्ली की दुम काट देना, मुग्ों के बच्चों का मार डालना अथवा खाने के सामान पर केरोसिन डाल देना-ये सव वहाँ के साधारण आमोद- प्रमोद के नमूने थे। समाज के इस वातावरण में माइखेल, याकोभ पाले- पोसे हैं। इसलिए निर्दयता में इनको जे आनन्द मिलता है, वह इनका कोई व्यक्तिगत अपराध नहीं है| काशिरिन परिवार में दो बाहरो आदमी हैं। उनमें से एक এ] ग्रेगरी ই | इसी के साथ काशिरिन ने रगरेज़ का काम शुरू किया था। बाद को चालाकी से काशिरिन मालिक बन बेटा है और भलामानुस ग्रेगरी अ्रत्र उसके कारखाने में एक कारीगर मात्र है। अन्धप्राय ग्रेगरी किसी प्रकार से अभी काम कर रहा है! किसी दिन काशिरिन उसे बेकार समककर बिदा कर देगा। उसके बाद ग्रेगरी को द्वार-द्वार पर भिक्ता माँगकर जीविका निवांह करना पड़गा | माइखेल ने याकौम के लड़के साशा को यह सिखलाया कि ग्रेगरी के अंगुश्ताने को खूब गरम कर उसके बगल में रख दे। इसका उद्देश्य निष्टुर आनन्द का उपभोग करना था | दुर्भाग्य वश बूदे काशिरिन ही ने उसे हन लिया ओर यन्त्रणा के मारे पागल की तरह नाचने लगा | यह देखकर भी माईखेल ओर याकोभ की आनन्द ! परन्तु माईखेल ही ने अपराधी साशा की पकड़वा भी दिया ! मार शनिवार के लिए ताक पर रख दी गई। प्रति शनिवार को काशिरिन सारे सप्ताह के अपराधों का विचार करता है। उसकी यह धारणा है कि अपराध की सज़ा देना एक आवश्यक कर्तव्य है| ब्रेत मारकर बेहोश कर देना ही सज़ा की उचित मात्रा हैं | उसी हफ़्ते में आलेक्सी भी देवात्‌ एक अपराध कर बैठता है। कपड़ा गंगा केसे जाता है इसे जानने के लिए. शिशु के मन में कौतृहल जग उठता है ओर साशा की सलाह से वह एक काम कर बैठता है। आलेक्सी एक मेज़पोश




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