पादप पारिस्थितिकी पादप भूगोल एवं जैव सांख्यिकी | Plant Ecology, Phyto geography & Biostatistics
श्रेणी : भूगोल / Geography
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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
312
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)पर्यावरणीय कारक 1
(स).. ऐसे क्षेत्र जहा केवल सर्दी के मौसम मे अच्छी वर्षा होती है वहाँ दृढ़पर्णी
(000511089) प्रकार के वन होते है । पेते वनो मे छोटे वृक्ष अथवा
झाड़ियों की बहुतायत होती है |
(द) ऐसे क्षेत्र जहाँ गर्मी के मौसम में अधिक लेकिन सर्दी के मौसम में
अपेक्षाकृत कम वर्षा होती है वहाँ चारागाह या घास स्थल (01255 18105)
होते हैं ।
(६). ऐसे क्षेत्र वहाँ गर्मी एवं सर्दी मे अल्प मात्रा मे वर्षा होती हो वहाँ
मह्स्यलीय वनस्पति पैदा होती है |
वर्षा एव तापमान का मिन्नित प्रभाव किसी भी स्याने पर पायी जाने वाली वनस्पति
को अत्यधिक प्रभावित करता है | उदाहरणार्थं ~ भूमध्य तथा उष्ण कटिबन्ीय क्षेत्रो मे
अत्पाथिक वर्षा तथा उच्च तापमान के फलस्वरूप विश्व की सर्वाधिक विकसित वनस्पति
“उष्ण कटिबन्धीय वृष्टि बन” [7002] एड 10551) बनते हैं । उत्तरी एवं दक्षिणी
अक्षारा (1307006) जलँ वर्षा या वर्षण तो सर्वाधिक होती है लेकिन तापमान नीचा रहता
है , वहं छेटे कोणधारी वृक्ष (^णलिणपऽ ४८८), छितर हुई कठोर झ्लाड़ियाँ एव शाक
तया लाइकेन इत्यादि पाये जाते है । सामान्य वर्षा लेकिन तम्बा एव तीव्र गर्मी के मौसम
वलि क्षेत्र मे शुष्क पर्णपाती (तध ৫50108005) বঘা কতীলী স্ান্তিতী (500) 9070৮)
वाली वनस्पति उत्पन्न होती है । देते स्यान जहाँ वर्षा अत्यन्त कम होती है और तापमान
काफ़ी ऊँचा चला जाता है वहाँ छोटे, छितणये हुए वृक्ष, झाड़ियाँ एव केक्टस आदि उगते
हैं और यहाँ की वनस्पति मर्स्यलीय प्रकार की होती है ।
(फ बायुमण्डलीय आर्द्रता (4९ पणवा) ;
जल वाके रूप मे वायुमण्डल मे आर्द्रता हमेशा विद्यमान रहती है| किसी स्थान
के वायुमण्डल मे आर्द्रता की मात्रा अनेकं कारणो पर निर्भर करती है और कारणो की
मात्रा में सख्यात्मक अथवा गुणात्मक परिवर्तन होने पर आर्द्रता की प्रतिशतता भी प्रभावितं
होती है | एक निश्चित ताप एव दाब पर वायु मे इतनी जल वाष्प हो कि वह ओर
अधिक जल वाष्प का समावेश न कर सके तो उसे उस ताप एव दाव पर सन्तृत्त आर्द्रता
कहा जाता है | तापमान बढ़ने से यह सन्तृत्त वायु असठृत्त हो जाती है यानि कि वायु की
जल वाप्य ग्रहण कएने की क्षमता तापमान के बढ़ने पर बढ़ जाती है। 20* फ० ताप
बढ़ने पर वायु की जलवाष्प ग्रहण क्षमता दुगुनी हो जाती है । सतृप्त आर्द्रता वाली वायु
का तापमान कम छने पर उसकी जत वाष्य ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाने के
कारण जल ओस की बून्दों के रूम मे सघनित हो जाता है |
वायुमण्डलीय आर्द्रता पादप जीवन को पौधे के जल सम्बन्धो के कारण प्रभावित
करती है। आर्द्रता का सीघा प्रभाव वाष्पोत्सर्जत की दर पर पड़ता है | निरपेक्ष आर्द्रता
(8050८ मैणापता9) को प्राय: किसी तापमान विशेष पर सतृत्ति के लिए अपेक्षित
जलवाष्प मात्रा के प्रतिशत के रूप मे अभिव्यक्त किया जाता है | इसे आपेक्षिक आर्द्रता
(1९[80५८ #ैणणाता9) कहते हैं | उदाहरण के लिए 40 प्रतिशत आपेक्षिक आद्रता का
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