क्षत्र चूड़ामणि | Kshatra Churamani

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Kshatra Churamani by निद्धामल मैत्तल - Niddhamal Maittal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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क्षत्रचूडामणिः । ` १७ ~~~ -~--~--------* यह सुनकर स्वामी गुणमालाकी व्यथाका सूचक पत्रको पढ़कर खेचरी गन्धवेदत्ताके लिये ही खेदित हुए | फिर ससुरालके सब मनुष्य उनके छोटे भाई नन्दाल्यको घेर कर उप्तसे प्रेमाछाप करने लगे। _ तत्पश्रात्‌ एक दिन बहुतसे ग्वाल्यि रामाके अद्जणमें आकर इशप्त प्रकार चिल्लाने लगे करि वने हमारी বাই অন্তু मनुष्योंने रोक ली है उनके आक्रदन शब्दों सुनकर श्वसुरसे रोके हुए भी जीवंघर कुमार उनकी गोऐं छुडानेके लिये बनमे गये वहा जाकर क्या देखते हैं कि गौओके पकडनेवाले नन्दाब्यके चले आमेपर गःघर्व- दत्ताके द्वारा भेजे हुए सब मेरे भिन्र ही है उन सबने मालिककी तरह उनका सन्मान क्रिया सौर जीवंघर स्वामीका मित्रवद्‌ उन लोगेंके व्यवहार न करनेसे ओर अधिक सन्मान्‌ करनेसे उन पर सदेह हुवा जर उनसे एकान्तर्में उस्तका कारण पूछा मित्रोमेसे प्रधान मित्र पद्मास्यने कहा “ स्वामित्‌ ! आपके वियोगसे दुखत हम लोग आपके समीप आते हुए कुछ समयके लिये दण्डका'ण्यमें ठहरे वहा पर तपस्वियकि आश्रमकों देखनेके लिये इधर उधर घूमते फिरते हुए हम छोगोने एक स्थान पर 'किसी एक पुण्य माताफो देखा उस माताने हम लोगोंसे पूछा कि तुम कहाके रहने वाले हो ओर कहां जा रहे हो फिर हमने आपकी घटनाका सब वृत्तान्त मातासे कहा जिससे उन्हें दारुण दुःख हुआ फिर वार २ आश्वासन दिलाकर उनकी जाज्ञा छेकर आपका वृत्तान्त जानकर आपकी सेवामें आये हैं ”” फिर जीवैधरस्वामी जीवित जननीको




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