स्वप्न | Swapn

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पहला सग [ १९.| २० |खेर रदी ह जिन पर जल कीवृदं मुक्ता सी द्युति धरकर। पैसे पद्म-प्न से पुरुकितविमल सरोवर में नोका पर ॥ कहते हुये पद्य से खुन्दरललना के है दग मुख छर पद्‌ । उसको रोमाश्ित करने सेबढ़कर ओर कहाँ सुश्व फी इद्‌ ?| २१ |पक बद्‌ जर घन से गिरकरसरिता के प्रवाह में पड़कर। जाता हूँ मैं फिर न জিরা?यह ॒ पुकारता हुआ निरन्तर ॥ चला जा रहा है आगे सेकैसा है यह दृश्य भयावह । इस अस्थिर जग मे क्षया मेरेलिये नहीं है चिन्तनीय यह्‌?




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