श्वेताम्बर तेरह - पंथ | Shvetamber Terah Panth

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
128
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)चस आर स्थावर -जीवि -
-- समान नहीं है।
শীতে
अब हम तरह पर्यियों के उन सिद्धान्तों पर प्रकाश डालते #
जिनके आधार पर तेरहपस्थी छोग प्राणी रक्षा तथा আনুন
रके द्विये गये दान में पाप बताते हे | यह तो बताया ही
चुका है कि साथु ओर श्ावक्ष का आचार एच नहीं है | उनकी
दसरी दर्लाल यह है, - कि एकेल्षिय से लगावर पंचेश्धिय तक ये।
जीव समांन हैं। इसलिए एकेश्चियादिक जीते की हिंसा करके
पंचेद्धिय की रक्षा काना धमे था एण्य कैसे हो सकता हैं ?
ये दत क्वः
जीव मारी जीव राखणा, समे नरह दो भगवन्त ययन ।
ऊधो पथ क्ूगुर चलाविेयो, शुद्ध न सेपरे दो एटा यतर् नयन
अनुकम्पा द्वा जदा
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