शासन समुद्र भाग - 6 | Shasan-samudra Part - 6

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Shasan-samudra Part - 6 by मुनि नवरत्नमल - Muni Navrtanmal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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शासन-समुद्र भागय-६ ५ गण वर्णेन गीतिका मे स्वगेवास तिथि वैशाख कृष्णा १ है :-- उगणीसं तेरे पूजे चष, विद एकम वैसाखे। कायं सारयो जन्मस्‌ धारयो, भलो भलो जन भाखं ॥ (पूज० गृु० ब० ভা০ $বা০ ও), आर्यादर्शन कृति मे सं० १६९१३ में दिवगत साधु-साध्वियो में भी उनका नाम হি. बे गाणी पुंजलाल रे, अठारसये इक्यासिये । चरण उज्जेण विज्ञाल रे, ए बिहु' (शिवजी ७८) परभव पांगरचा ॥ (आर्यादर्शेन ढ़ा० ५ सो० ४) ७. जयाचाये ने मुनि श्री के गुण वर्णन की एक ढ़ाल बनाकर उनकी विशेष- ताओं का उल्लेख किया :-- सुगणा साधजी, वारु सत थयो पजो । नगीनां संत जी, पूंजो गु्णां तणो कूजो ॥ इत्यादिक ***** ॥॥




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