ब्रजभाषा और ब्रजबुलि साहित्य | Brajbhasa Aur Brajbuli Sahitya
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
18 MB
कुल पष्ठ :
698
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)विस्तृत विषय-सूचीविचय | हा पृष्ठ-सख्या
पहुला अध्याय पप्ठभूमि १-१५०
(१) बष्णव धम का सक्षिप्त विवरण ३-५७(ক্ষ) चेष्णव साधना फा इतिहास वष्णवे धम था ब्रजभाषा ३७३६
और झजबुलि से सम्बध-बेष्णव प्रम॑ का स्वरुप-वष्णव
साधना के विकासक्रम का विविध वर्गेकरण-वष्णव धम
वी प्राचीन सज्ञा_ पाचरात्र मत -पाचरात्र साहित्य॑--
पाचरात्र-सिद्धात का विभाजन-परमतत्त्व वासुदेव-
शक्ति और गविनमान शवित-त त्त्व-सृष्टि तत्त्व-पडगुण
पाचरात्र मत में लीलावाद-जाव के द्विविध भेद-पाच-
रात्र-साहित्य में रावाइष्ण-पाचरात्र मत वा साधन
पक्ष-पाचरात्र मत में भक्त की प्रधानता-बष्णव घम
की दूसरी प्राचीन सज्ञा 'भागवत धम -शिला-ल्स और
प्राचीन ऐेखा में भागवत घम का उल्लेख-गुप्त-सरेश
नीर वप्णव धम~~आख्वार सन््तो को भावधारा-द्वादश
आलवार सन्त-मालवार सन्तो वा सार्हित्य-भारवासो
की भक्तिमयी सांधना-आलवारो की विश्ञेपताए-दाग-
निक आचार्यो कौ भावघारा-नाथमुनि परम्परानुसार
सवप्रथम गण्य-यामुंनमुनि (९१६ १०४० सन् ईसवी)
श्रोसम्प्रदाय या विनिष्टा इतवाद श्रीरामानुजाचाय(१०१७ ११३७ सन् इसवी)-उपास्य-स्वरूप-भवित
ओर प्रपत्ति की प्रधानता-ईश्वर का स्वरूप-सृष्टि
भगवान् की छीला ह-चित् वा स्वरुप प्रकार-अचित् का
स्वरूप-भक्ति के! साधन-भक्ति ही एक मात्र हक्ष्य-
भवित वा मार, प्रपत्ति-प्रपत्ति के मेद-जीव और भगवात का सवध-जीव में दास्यभाव-श्रावष्णवों के दो
दल-अह्म सप्रदाय या द्वेतवाद मंध्वाचाय (११९७
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