जैन विद्या उपलब्धियाँ और संभावनाएँ | Jain Vidhya Uplabdhiya Aur Sambhavnay

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Jain Vidhya Uplabdhiya Aur Sambhavnay by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ने क श्वे = ७, सैनं प्रम्थालय हमै अर उसा वारैः बजट हमै, वहः साहित्य पदृने-पदृ मे उस पर चर्चाएँ आयोजित करने का সঙ্গলল जारी फिया जाये । शााश्व-सभाएँ भी हो জীব ছল সকার की पीरचचाएँ भी | इस प्रस्तावना में इस सम्बन्ध में कुष्ठ विस्तार मे लिखने का अभभिप्राय ही दह ই ছি गंगोष्दी जिन थौजनाओं' «ये लिष्फर्ष सर्प से सामने रख रही है उनदे क्विवान्वयन का लक्ष्य ग्रन्थ्या স্রতোক্ষাল ই. फिल्लु प्रकाशानों की साथाकता इसमें है फ्ि वे पाठ्कों' तक पहुँचे । शविद्वज्जम समस्या के इस पहलू से 'निरपेक्ष नही टो स्पते, प्रायः है भी नही, पिन्तु इर, , লী ঘানি লা नही कस्ते, समाज कमै उन्थालय स्थापित छदने फे लि' पण पर प्ररत नही फरतै । छटस्ना चाहिए | * यजनओं का विस्तार इतना व्यापक है कि कोले भारतीय जानपी- या फिन्ही' अन्य एक-दो संस्थाओं द्वारा इनका প্রিএাল্নঘল অল লর্ধী है । चिद्दत्‌ पररिष्दों को ऽस ददिश में 0,पाशील होना चाहिए । सारी আীজলাশি। पर वचार कटने के लिए शध संस्थाजौ फी एक संयुक्त बैठ, होना जाक्छयः है । * बम्बरद संगोष्ठी की उपन्नीब्ध का शक्ति इस विवरणा में प्रीतीबी म्बत ऐ आलेयों और भाक्षणा' की प्राय: पूरा-पूरा देने कय प्रयत्न करना बहुत व्य+ साध्य है । बहुत बड़े प्रयास, गाध्यन और प्रबन्ध ढी' आकायाता होती है। इतनी' बड़ी गोष्ठी बुलाने दाग यह प्रार्थमक प्रयोजन बहुत अच्छी तरह सिद्ध दुः फि प्राचीन-अवाधीन शौली के विनी क হক म॑व सामने जाया আহ কা पद्ीतियो' की शौली अनग-अलग हौने पटर भी सगौष्ठी ठे उद्देश्य ठी জাজ পা অন্ু্মলল আঁ কাখীল্জলল «ने पद्धति पर अद्भुत सर्प से जिचार-साम्थ उभा कर सामने आया । वातावरण प्रीतिकर रहा | * एक कभी ौ्व्िोवं वय ते कटयी, और इस और बार-बार वक्ताशौः ने ध्यान आकृष्ट किया कि समय बहुत कम मिला । वक्‍ता ओौर श्रोता वौ लालायित्‌ रह गए চি তত জীন এই, कछ अौर सने । कटठिनाई यह रदी फि बम्बई में तीन दिन ठहरना और आने-जाने की यात्रा के लिए दोनतीन दिन कप अतिरिक्त समय निकलना पर्यस्त विन कै भारी पड़ता है । रेल में रिरजन भी इच्छानुसार नही मिल पाता, अतः गौष्ठी के दिनों को बुर] समत नष भा । संयोज्छ के स्प में भाईं उठा. नेमीचन्द की और मेरी कठिन पना ददं । वह तो শী साहूजी' का सदाए' प्रत्येक क्षा उपलब्ध था, और ~5~




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