साहित्य - परिचय | Sahitya - Parichya

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : साहित्य - परिचय  - Sahitya - Parichya
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about मदन मोहन शर्मा - Madan Mohan Sharma

Add Infomation AboutMadan Mohan Sharma

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
९,शब्द दवितियाँ तीन हैँ--- १. अभिधा २. चकषणा ओर ३. व्यंजना ।अभिधा से शब्दके साधारणं अका बोधं होतार) शब्दोको सुनतेही यदि` अुसके अर्थक बोध हो जाभे तो यह अुस्तकी अभिधा शक्तिका कार्यं हुआ ।अदाहरणके लिओ हम गाय, मेज, आदमी, शेर आदि शब्दोंकों ले सकतेहैं। जिन शब्दोंके सुनते ही हमारे मनमें जो चित्र खड़ा होगा वह सभीके मन में| लगभग अक सा ही होगा । गाय साने चार पैरका अंककब्द अंसा पशु जो दूध देता हो, जिसके दो सींग हों, ধৃত হীशक्तियाँ आदि-आदि | असी तरह आदमी और शेर आदि शब्दोंसे| विशिष्ट जीवोंका ज्ञान होगा । यह स्रवेसाधारणतयाकोषः, व्याकरण तथां जिन शब्दोंका व्यवहार करनेवाले सर्व-साधारण लोगोंसेजाना जा सकता है | अतः यह अर्थ अमिधेय अथवा बाच्याथथें कहलाओगा और दब्दंकी यह शक्ति अभिधा शक्ति कहलाओंगी ।शब्दके प्रधान या मुख्य अर्थको छोड़कर किसी दूसरे अर्थंकी लिस- लिओ . कल्पता करनी पड़े कि अर्थ ठीक वैठ जाअं वर्ह लक्षणा होती है ।जब शब्दके अकसे अधिक अर्थ होते हों ओर वाक्यके अ्थंको ठीक समझनेके लिओे विशिष्ट अथंको संमस्नेका प्रयत्न करना पड़े वहाँ लक्ष्याथं होता है गौर शब्दकीौ शर्विते लक्षणा कहा अंगी जंसे--.. “लाला लाजपतराय पंजाबके शेर थे ।” यहाँ निश्चय ही शोर शब्द अपने सामान्य अथरम प्रयुक्त नहीं हुआ है | आदमी शेर नहीं हो सकता । यहाँ दोर शब्दका अपबयोग करके अेक विशेष प्रकारका चमत्कार अंत्पन्नं ` किया गया है। शेरसे यहाँ अर्थ है शेरके समान वीर, साहसी; तिडर, निर्भीक । जब मुख्यार्थंके साथ-साथ शब्दका और भी कोओ अर्थ प्रकट होता हो तो असे लकष्पा् कहते हैं ।तीसरी शक्ति व्यजना है। अभिधा और लक्षणा द्वारा व्यक्त होनेवाले अर्थक्े अलावा यदि और ही किसी अन्य अर्थमें शब्दका प्रयोग




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now