पत्तियां | Pattiyan
श्रेणी : साहित्य / Literature

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Add Infomation AboutShiv Kumar Singh Sahay
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
140
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)पत्तिया | १७ফলো ই । दूसरा धर वडी मुशिक्रिल से अषना वनता है । पर आजमेरा
यही घर है । मेरी सारी उमर यही बीती, और जितने दिन बाकी है,
वह भी यहीं बीत जायेंगे । कुछ दिनो वाद तू भी सब समझ जायेगी ।””
মহ্ कह माँ ने प्रतिया को अपने गले से लगा लिया, और हलकी-
हलकी थपकी देते हुये चुप हो गई । अपने-पराये का सब भेद माँ की
यपकियो नै भूला दिया । पतिया चुपचाप पड़ी रही । न हिली, न इती।
उसे इसका भी पता नही चला कि इसी अवस्था में पड़े-पड़े उसे कब
नींद आ गई ।
प्रतिया सो गई। माँ अभी भी जाग रही थी । उसकी आँखों मे नींद
नहीं थी ।
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