जैन धर्मामृत | Jain Dharmamart
श्रेणी : जैन धर्म / Jain Dharm

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutSidhdasen Jain Goylia
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
880 KB
कुल पष्ठ :
78
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about सिध्दसेन जैन गोयलीय - Sidhdasen Jain Goylia
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१५
१--द्रन्यलिगी ( आल ज्ञान रहित )
२०-भावलिंगी ( आत्मन्नानी )
२-स्थभाव---
१---सरलऊ स्वसाव ( त्रियायथ की एकता )
२-कुरिख स्वमाव ( त्रियाग की विपरीतता )
२-- कषाय-.-
१--मन्द £ थाडी )
२--तीत्र ( अधिक )
२ -मे।दनीय--- ेु
१-- दर्शन भाइनीय ( दर्शन गुण का घाते )
२---वारित्र मेहनीय ( चारित्र गुण के घाते )
२--नाम ऋषभनाथ---
१---#घमनाथ
२---आदिनाथ ( कैंशरिया भगवान )
२-- नाय पुष्पद् त-
९---पुष्पद तनाथ
२- विधिना
२-- मन --
१--्रव्य सन { शरीरं रुप )
२--भाव मन (आत्मा रुप )
User Reviews
No Reviews | Add Yours...