महाकवि देव | Mhakavi Dev

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Mhakavi Dev by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्रष्ठ भूमि ६ इसे पूर्णतया मुस्लिम-विरोधी बना दिया ओर बहुत बलिदान करके भी यह धर्म मुसलमानों से मो लेता रहा | এ यूरोपीयों के आने के वाद ईसाई धर्म का भी यहाँ धीरे-धीरे प्रचार परारम्म हथआ | अंग्रेजों को नींव मज़बूत होने के बाद यह भी হালপন हो गया अतः राजर्शाक्त का सहारा पाकर फलने फूलने लगा | লিল प्रकार अनेकानेक लालचों या भयादि से व्रत से हिन्द मुसलमान हये थे अब बहत से ईसाई होने लगे ओर इंसाइयों की संख्या धीरे-धीरे वदने लगी | लाड बलज्ञली के समय मे सात देशी भाषाओं में बाइबिल का अनुवाद कराया गया | स्थान-स्थान पर चर्चों की स्थापना हुई | इ प्रकार इस शर्म की भी उत्तरोत्तर उन्नति होने लगी | | रीतिक्रालके अंतम चरगु में यूगेव्रीय सम्पक के कारण हिन्दू तथा मसलमान कह बैज्ञानक ओर तकशील हो गये तथा अंधविश्वास दर 'होने लगा पर इस परिस्थिति ने री।तकाल पर कुछ प्रभाव न डालकर हिंदी के आधुनिक काल को अमावित किया | इस प्रकार हम देखते हैं कि रीतिकाल में. धासिक दशा भी वदी ग्रव्यवस्थित-सी शी | धर्म को भूल कर लोग प्रायः अंधविश्वासों तथा मृख्ंतापर्ण रूढ़ियां को धर्म समझने लगे थे | वद एक वाक्य में कहना चाहें तो राजनी।त एवं समाज की भाँति धर्म भी ज्बग्रस्त था| आचार ओर नैतिकता की भी यही दशा थी। नीचे से ऊपर तक घृसखोरी, थोखा, फ़रेब, अत्याचार एवं अनाचार का साम्राज्य था | (उ) कला १. स्श्रापत्य मुगलां का स्थापत्य प्रेम स्थापत्य के विश्व में अपना विशिष्ट स्थान रखता हू | बाबर से ही इसके अंकुर मिलने लगते हैं| बाबर को भारतीय स्थापत्य उच्चकोटि कान लगा अतः उसने अपनी इमारतों के लिए,




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