मन्नू भण्डारी का कथा साहित्य मनोवैज्ञानिक विश्लेषण | Mannu Bhandari Ka Katha Sahitya Manovaigyanik Vishleashan

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Mannu Bhandari Ka Katha Sahitya Manovaigyanik Vishleashan by उषा अग्रवाल - Usha Agrawal

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about उषा अग्रवाल - Usha Agrawal

Add Infomation AboutUsha Agrawal

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
विघ्माय ~ प्रद 1 পা বরন 705. ছটা সস (০৬38 তা प भिक म এ সা কন জা 5 আট मन्तु तदास ~ व्यज्नित्व पुर्वं परिचित-पमाज : कि गप पते कथमक फी यि सता (केः तककः ष्ये भ सतो मिः गरदः पय ध्यापकी लात प्ति शिकत ভাটি এরিয়া सोति शाः तनुते पदे शकि तति ওযা किते दैत ता रथे गि स जीवन त ०, धय त নী টিটি जिला का न रित न्व्‌ 4 त्तिः आ [र টি जीवन की ঢরহিতি ল দবিজায জা টিলা লাতিক आधार हू | ग़री परिवार की अभिन्‍न अँग ভী नरह, उछी श्र 51 पारिद नारी के लिये छोई कार्य अपतम्भव नहीं । उक चेतना प्रभाव, तारी का अदे. अस्तित्व शमौ जन्प देता উই | प्राचीन मास्तीय चिन्तन की दो टि ऽ = जा नर्‌ {न খন प्राधा था ॐ पा লাশ धि प्र भा पा हट प পু চুর 1 পর পু তালে সপ कह শসা ४25 8 ५५ स ~ इ, ताशे की सढ़ानता की किसी न किसी জান मे क्लीकार हो ४ কাত ८9 भौ ০১০০১ ५५ त, ण भ्न (८; क्फ এসসি ০ মে जुलाई मिभ स ५ प শি জিও ति बहिकि अगीकार भी करती ভ | লাকা জা হল লত ৪ ह्न आष ६ < के ০ এ ভিত # বা हा ; प्रा क ल পপ तन पधि प्न [नन्त {ण কা জক্ভলিল্ত হা ভা ঘত় লা जीवन नारी मन की अन ५ 9 ৪৮4৪ (न सेञ्टाभा के निर्माण জা জল दती ई | व्ण तं अपना सन ह ¡¦ ह्ला न्धः ५५. ह कि नारी पृष्टिट है, जन्म से मरण तक की रात्राय कवा भछे ही न दे, पर अपने मन छे यात्रा' की प्रूर्णा आहूति तो अवश्य करती हु | यह सज्चाई लवन फी, मन्तु जी के क्या-प्ता'हित्य को पढ़ने पे छपी | वही जब उनके जब उनके देहली प्रवास के समय उनसे उनके घबरा मिलने पर बातवीत के दोराम पायी, उसे ठगने सगा कि उन्ती नो दला हृ, उसी क तो एक आधार নালা ह | साधारण साॉँविले रंग, अंदाज का भारतीय नारी का = नाव आर मार्थ पर चमकती बड़ी -जिन्दी ष प्ता खगत हु कि यथार्थ का' पा उता, उनकी अपनी व्यवस्था' ता ह हौ, पर उनका अपना चिन्तन स्वर माघा के रूप मे परिभाशित करता ই 1 2 किसी जातवीत का बा नहीं घमझाती, नचि रसं कर पाने में अपना कर्म घछमझाती ই | জাজ दंखती हु, क च भः ` क्र तिघोषा ( साप्ताहिक), (मन्तु जी से ठ টি | बात.) 7৬ দল




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now