श्रीमद्भगवतीसूत्रम् भाग - 6 | Shree Madbhagavati Sutram Bhag - 6

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Shree Madbhagavati Sutram Bhag - 6   by विवेक - vivek

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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# ` {७४१ 1 | स्थविरो के प्रश्नोत्तर ९ > १ 2 भी आपको विशिष्ट बाते बतछाता हैं । आग ओं आप पहले से दीं जानते थे, परन्तु यद नहीं हा हजारों मन बोमे खींची जा सकता हे! विज्ञान द्वार य्ह बातें ` मालूम हाद आज कल्नः के वज्ञानक्र इस: भातेक विज्ञान भ्‌ ही षडप है; -केकिनः प्राचीन क्लः $ ज्ञाना ने-पूरौ चार्यो ते-चैतन्य का चिज्लान्न बताया. है ।; आज जा विज्ञान चल रहा और वंढ रहा है,;छोगंजिंस विज्ञान में पढ़े हुए है।.इस| विज्ञान हदः! ८ से ता शान्ति का नाश जार छअशान्तकं बद्धा স্‌ ` दक समाचारं पतन मेने पदा था किएक यूरोपयन न कहा-कि.आज. फेल में सब से बड़ा आदंमी हूं । उसने अपत्त डृप्पन के विषय. লাস देते हुए. बताया [के जा मे रज्ञा देता हूँ, तब मशीन चलती है और जब गाज्ञा देता हूँ, मंशीन बंद হা আধা, ই. उस्न प्रयोग करके दिखेलाया । एक बड़ी ` मशीन को चतन का हुक्म (द्या । मशीन ` चलने लगा | ছি मशीन को वंद हनि की आज्ञा दी, तब वह बन्द हा गई ' उसने उंमभाया-मैंने वदं कोम जादुःसे नदी किया द। नन मन का निर्माण करके, इसमें रेडियो आदि” को फेला ' सवय ` स्थात किया है कि मेरे हुकेस का भार मशीन पर पड़ता' हआर! उस भार के कोर प्रदे चने लेगी दै तथा वेद्‌ हा जाती. मन ' अ रं यही मंशीनः वनद दै लेकिन एसी वहुत-स वन सक्ता ह ।




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