स्वाधीन भारत | Swadhin Bharat

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Swadhin Bharat by महात्मा गाँधी - Mahatma Gandhi

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about मोहनदास करमचंद गांधी - Mohandas Karamchand Gandhi ( Mahatma Gandhi )

Add Infomation AboutMohandas Karamchand Gandhi ( Mahatma Gandhi )

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
राष्ट्रीय सभा ( कांग्रेस ) तथा उसके व्यपस्थापक | ४ मानता ही नहीं तो फिर आपकी बातोंको मैं क्‍्यें। सुनने लूमा। 'निसे आपने जातीयताके खयाल्‍ूसे बढ़ा आदरणीय समझा--- जातीयताका जन्मदाता बतछाया है---उसने मास्तके लिए क्‍या किया? उसने तो कहा था किं शासनवर्गं न्‍्यायसे चलेंगे, हम छोगोंकी चाहिए कि हम भी उनसे प्रेमभावसे मिं । सम्पा ०--बस, चुप रहिए। आपको शर्म आनी चाहिए । इतने बड़े प्रतिष्ठित पुरुषके बारेमे ऐसी रूज्जा-जनक बातें कह रहे हैं | केसे निलंज हो । आपमे क्ृतज्ञताका लेश भी नहीं रह गया है । उनसे आप क्‍या चाहते थे और उन्होंने क्या नहीं किया । जानते हैं मारतमाताके चरणोंम॑ उन्होंने अपना जीवन समर्पण कर दिया था । जब हम लोग आँखें बन्द कर कानोंकी मैँद कर गादी नींदम पडे थे उस समय दादाभारंहीने हम लोगोंको जगाया और दिखलाया [कि अँगरेज लोग हमारा खुन चसे चले जा रहे हैं। उन्हीं दादाभाईका यदि अँगरेज जन- तामं अट्ट विश्वास था तो इसमें हजेकी बात ही क्‍या है । क्या एक कदम आगे बढ जानेहीसे हम लोगोंको उनका महत्त्व मर जाना चाहिए ? और क्या इसीसे हम लोग ज्यादा बुद्धिमान हो गये ? क्या इसे मी ब॒द्धिमानी कहते हैं कि जिस सीढीखे हम उपर चदे अने उसीको दुकरा दं । याद रखिए उसका एक




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now