धर्म - प्रज्ञप्ति खंड १ | Dharm Pragapti Khand 1

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Dharm Pragapti Khand 1  by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श8 दशवेकालिक वर्गीकृत १४--जाए सद्भाएं निक्‍खंतो परियाय - ट्वाणमुत्तमं । तमेव अणुपालेजा गुणे आयरिय-सम्मए ॥ (८।६०) १५--जोगं च समण-धम्मम्मि সুজ अणलसो धुवं । जन्तो य समण-धम्मम्मि अद्र लह अणुत्तरं॥ (८।४२) १६--धुव-सीलयं सययं न हवएजा । (८।४०)




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