कृषि उत्पादकता समस्याएँ और समाधान | Krishi Utpadakata Samasyaen Aur Samadhan
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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
41 MB
कुल पष्ठ :
122
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१४ | कृषि-उत्पादकता : समस्याएं ओर समाघ्रान
है । पंजी, मशीन, उवैरक, सिचाई के साधन, अच्छे बीज इन सभी चीजों की
कमी है। लेकिन इस कमी को जहाँ इनकी मात्रा को बढ़ाने से दूर किया जा सकता
है वहीं इनके अच्छे इस्तेमाल और उचित व्यवस्था द्वारा भी दूर किया जा सकता
है, जो उत्पादकता से ही सम्भव है।
औद्योगिक उत्पादकता को बढ़ाने की दृष्टि से भी कृषि-उत्पादकता बढ़ाना
आवश्यक है । औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में जो लागत-सम्बन्धी विश्लेषण किये
गए हैं, उनसे प्रकट होता है कि औद्योगिक वस्तुओं का ६० प्रतिशत उत्पादन-
लागत कच्चे माल पर निर्भर करती है। इसके अलावा कुल विदेशी मुद्रा का
४५ प्रतिशत क्ृृषि के क्षेत्र से ही प्राप्त होता है। कषि-उत्पादकता बढ़ने से कच्चा
माल सस्ता मिलेगा और उद्योगों मे चीजे सस्ती ओर अच्छी बनेंगी । जसे अच्छे
और ज्यादा कपास से अच्छा और ज्यादा कपड़ा बनेगा और विदेशों से
कपास मंगाना बन्द हो जाएगा। साथ ही, उत्पादकता बढ़ने से जब उत्पादन-लागत
कमहागी तो विदेशों में कृषि-पैदावार की मग बढ़ेगी ओर उससे अधिक विदेशी
मद्रा मिरु सकेगी । वस्तुतः किसी देश की आधिक प्रगति कृषि और उद्योग दोनों
की प्रगति पर निर्भर करती है । यह कैसे सम्भव है कि हमारी तरक्की उस हालत
में भी होती रहे जबकि औद्योगिक उत्पादन तो ७ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़े
और कृषि-उत्पादन सिफं ढाई या तीन प्रतिशत की दर से । মি
निर्वाह खेती बनाम व्यावसायिक खेती
खेती में भूमि सबसे मुख्य साधन है । भूमि प्रकृति की देन है । उसे घटाया,
बढ़ाया नहीं जा सकता । हमारे देश में जितनी भूमि खेती में छाई जा सकती थी,
वह करीब-करीब आ चुकी है। गत वर्षो में जो पैदावार बढ़ी है, उसका अधिकांश
अतिरिक्त जमीन को जोत में छाने से बढ़ा है। अब जोत के लिए अधिक जमीन
_ उपलब्ध नहीं है। अतः यह जरूरी है कि जितनी जमीन है, उस पर ही अधिक पैदा
किया जाय और इसके लिए हमें कृषि के क्षेत्र में उत्पादकता की विधियों को अप- _
नाना होगा ।
वस्ततः कृषि के क्षेत्र में विकास के लिए हमे निर्वाह खेती के स्तर से ऊपर
उठना है । भारतीय कृषि की दुर्देशा का एक प्रमुख कारण' यह है कि हमारे यहाँ
चेती एक लाभदायक व्यवसाय न होकर अधिकांश रोगों के लिए गुजर-बसर करने
का साधन है जिसे अंग्रेजी में 9:051816108 (71718 (निर्वाह खेती) कहते हैं।
अधिकांश पिछड़े हुए देशों की यही समस्या है । अगर.हम चाहते हैं कि हमारी खेती
सिफ गुजर-बसर करने की खेती न रहकर खाभदायक धन्धा बने, इसमें लगे लोगों के
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