तुलसी की भाषा | Tulsi Ki Bhasha

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Tulsi Ki Bhasha by डॉ. जनादन सिंह - Dr. Janadan Singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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৭ | विषय-प्रवेश ११ तुलसी पर हुए भाषा-सम्बन्धी काय के प्रकाश मे प्रस्तुत विषय की उपयोगिता पूववर्ती विद्वानों द्वारा चुलसी साहित्य का विविध पक्षा को ल्कर अनेक प्रकार से अध्ययन क्या गया है परम्तु तलसी वी अवबी मापा का भापातात्विक अध्ययन गौण ही रहा है । केवल तुस्सी की अवधी भाषा की कृतियों को आधार बनाकर उसका भाषा तात्त्विक अध्ययत अमी तक प्रस्तुत नही क्या गया था। तत्वारीन अवधौ के स्वष्प की विशद लाक प्ररतुत करना आवश्यक समझकर अनु सघित्सु ने इस काय को सम्पन्न करने का सक्ल्‍प किया ओर आज उसे सतोष है कि वह কাজ पूण हा गया है। यह प्रयास कहाँ तकः साथक एवं सफल है इसका मिणय विद्वान परीक्षक करगे। अभी तक तल्‍सी का य से सम्बाधित जितना भी अध्यया हुआ हू उसे निम्त दो वर्गों मे रवा जा सकता है। डा० देवकीन ”ग॒ श्रीवास्तव वे शोतरप्रबघ तुलसी की भाषा से सहायता ऐकर इस विपय पर चर्चा की जा रही है-- १-तुलूसी विषयक साहित्यिक अध्ययन २-तुलसी विषयक मापा वेभानिक अध्ययन प्रथम वग को पुन दो उपयर्गों म बादा जा सकता है-- अ-परिचय ग्रथ एवं समालोचनात्मक कृतिया ब-स्फुद टीकाएँ एवं कांप ग्रथ (१) स~प्रथम वग तं भ तगत निम्नरिित बृ तिया परिगणित है-- २-बाबा वेणी मायवरास का मूर गोसाई चरित । २-आचाय भियारीदास का वा य निणय 1 समालाचाात्मक साहित्य क॑ अतगत मुख्यत निम्नलिखित ग्रथा का गणना की जाती है- (१) नोटस आन तसुल्सादास “1» जाज प्रियमन (२) रामायणी व्याकरण (गादस नतर अमर्‌ जाव নি रामायन आव तृटमी स) ग~~ ~~~




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