प्रिथीराज राठौड़ | Prithiraj Rathore

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Book Image : प्रिथीराज राठौड़ - Prithiraj Rathore
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about रावत सारस्वत - Rawat Saraswat

Add Infomation AboutRawat Saraswat

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
जीवन-वृत्तबश-परम्पराबीकानेर राजवश के सस्यापक राव दीका से चौय पीढी में (बीका लूणकर्ण जैतसो कल्याणमल) अकबर के समकालीन राव कत्याणमल हुए | कट्याणमल के ग्यारह पुत्र थे, जिनमे से चार--रायसिंह, रामसिंह, प्रिथीराज तथा सुरताण-+ उनकी सोनपश वश की रानी से उत्पन्न हुए थे। यह रानी अजैराज सोनगरा की पुश्री भवितमती थी । गो० ही० ओझा ने 'कर्मचन्द्र वशोत्कीर्ततक काव्यम्‌ नामक सस्क्ृत ग्रथ के उल्लेख से बताया है वि इस रानी का नाम रत्नावती था। शेष पुन (भाण, अमरा, गोपालदास, राघवदास, डूंगरसी, भाखरसी, भगवानदास) अन्य रानियो से उत्पन्न हुए थे! पुत्रों की सही सख्या के विषय मे पृथक्‌-पृथक्‌ धारणाएँ है। प्रियीराज का जन्म मार्गशीर्ष कृष्णा प्रतिपदा, सवत्‌ १६०६ को . हुआ था। प्रिथीराज के दो पुत--सुदर्शन (सुन्दरसिह) और गोवुलदास--हुए इनकी जागीर भूतपूर्व बीकानेर राज्य के गाँव ददरेवा (जिला घूरू) मे थी। इनके হাস “प्रिथीराज वीका' कहलाते है। गौरीशकर हीराचन्द ओझा ने अपने बीकानेर राज्य का इतिहास” में इनका वश-वृक्ष इस प्रवार दिया है--प्रिथी राज, सुन्दरसन (सुन्दर्रासह), वेसरीसिह, विजर्यासह, छर्नापहू, जीर्तासह, मुनकासिह, वुशलसिह, लूणकर्ण, सूरजमल, हरिसिह, गणपतर्तिह, तथा मेघसिह। सवत्‌ १७३२ के एक उल्लेख मे सुदर्शन के तीन पुत्र वेसरीसिह, समसाल तथा मानसिह, और केसरीमिंह के फतहसिह व हरनाथ बतलाए गए हैं। गोकलदास के पुत्र जगतसिह, माधोसिह और नाहरखान (जो बादशाही फोज से लडे) लिसे गये है 1 वैवाहिक जीवनजनश्रृतियो के अनुसार प्रियोराज के तीन विवाह हुए थे। इनकी पहली पत्नी जैसलमेर वे रावल हरराज को पुत्री लालांदे” बताई जाती है। हरराज की एक पुत्री 'गगा' प्रियोराज के बडे भाई महाराजा रायसिह को ब्याही थी तथा




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now