श्री सुदृष्टि तरंगिणी | Shri Sudrishti Tarangini

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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गाथाअज छरहशदेव बन्दे जरिमित जोतवमरण जग शकादहजुत्तो जन्तरिक्सभौमाए जपरापर जविरुद्धो जसुहोविवारों हैयो जहिसिरशग उक्कदो जन्धपे दोपसकज़ो जगयपठत जायाणो जसुह फलशकतिरियो जगमोप जन्तरखऊ जहमुहजमिसुत দযতলা जाग्यमग उवदैसो जादाधम्मससायो# 3 इठ न्थोगारढ जोगाख उपस वहसि भिच्छिसासोप्य र र्द ठाशकसौटोख्छ कोहा दीय कसायों कैवलशासयरहियोंग्रन्थोक्त गाथाओं की अकारादि भअनुक्रमशिकापृष्ठ सख्यः ', गथा। कचकंचग्द्‌ विख सखो ० ¦ किप्पस सिज तर वचय १२५ , किण्ह सील कपोतय ३१४६ । केवलकायण्हारो ३४६ | कम्महशीशिवकण्शी २७० , कुगय वार कपष्टो १८१ ख्ख २७७ | सथुवसम देह सोई २८२ | सतजहिकुर सुहवो ३२७ ¦ सुधा भरतिषरीरो ३३६ | स्त पौचय सनेहो ३७२ रा ४३५ | गद्‌ तश फासयमह्या गेयहैयोदेभी १७ | गिर सिर तरुफल पकऊ २७१ षद घुदतिससीतय उसराउ ज जयद सवदि ठवरा छक पितामह जरी ३३३ | जहिवतिजरिहितदुरऊ जहि पुर शह सतकारो ३९१ | जुगमट रघु हरिन्थायो जिश-पजा मुसि दाख १२४ | जाय लोय धम्मपुद्य १६८ | जीयसुहचयमोक्सो३९६६पृष्ट सख्या ' गधा३४४ । जहि मुखि भनिसहपृपो ३६२. , जम्मणमण जग तरगऊ ३६७ ¦ जुगम यठ वियोगौ ३७१९ ऊमरा विसयकसायौ ४६ ' ज्शिगख मुरु वच सावय ५३३ । जम उर करुणा धारय | जड़ दब्बो जुव॒णाणऊ१५ ক্স२४६ | भाण वेय पत्तावेय3१५ | ऋहिओ जारह मांणड ৪ ण१३७ | णाप सुदिष्ट तरणो २३६ णाम सथापन दृव्वो द | णाम सथायण दब्बो । णिपमय सेद दरिदये ७ | रह बलरहु हरि दोऊ णखंसगापसुणदियों १४४ | णिदामौचसमाणो २७३ स्त ३०१ | तरु भसोय सविठौ ३३१६ | तिक्कालेतियलाये ३२० | ठसकर पयण्यिवहणो ३२४ | तण वीणय बहु दासऊ ३३० थय ३४२ | थावर मिच्छु जणन्तौपृष्ठ सख्या३४६ ३७ ३६२ ३६२ ३६५ ४२७ ४३८न दव्व सेका मवभावो द्व्वय शश्र कालय दोस अठारह रहियो दोहं छियाली रहियों दव्वों सेत्तो कालय देसा पम्मसव्वा दानयतवयपसायो दुठणारी सठमित्तऊ दुज्जण जोक सममावो दीरघ धिति भ्रजसयो दसण वय सामायों१०४ ४४९३१९० | धम्मोधम्मफलतहैतव ३१६ | पम्मतरुफल जख़सुहयो ३४७ + धम्मसभाणिपपचयथ ३४३ | पम्मतरु मजगयदों ঘন १२२ २६२ २६८ ४४३पह्चचमुलपव्योपन्न महावयसहियो पुच्छवतीजुगवासर पणजग्रिजादिकुतवं पुण्णदाश्रस्तय पसुरक्शोकिससेटय| ९२ ! २७ ९३५ धम्मोचतुपयारौ१०६पृष्ठसरलयाशद३९ ११६ १२६ १६६ २९८ २९३ ३४१ २५४ ४३६६ 8७२२६४ २६७ ३३६ ३.४६ ४३२২০২ १२६ १६७ २०६ २३२ २८५




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