उत्तराध्ययन-सूत्र : एक परिशीलन | Uttaradhyayan-Sutra : Ek Parishilan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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उ० = उतत्तराघ्ययनउ० आ० टी० = उत्तराध्ययन-आस्माराम-टीकाउ० घा० टी० = उत्तराध्ययन-घासीलाल-दीकाउ० तु० = उत्तराध्ययन-आचाययं तुलसीउ० नि° = उत्तराघ्ययन-निर्णुक्तिउ० ने० टठी०=उत्तराध्ययन-तेमिचन्द्र-टीकाउ० शा० =उत्तराध्ययन-शापेंन्टियरउ० समी ० =उत्तराध्ययनः एक समीक्षात्मक्‌ अध्ययनके० लि० जे ० = हिस्टरी आफ दी केनौनिकल लिटरेचर आफ दी जैन्स कं ० जै ० =जैनघमं-केलाशचन्द्रगो० जी ० = गोम्मटसार-जीवकाण्डजे० লও == देखिए-कं ० ज०जे० भा०स०=जैन मागम साहित्य मे भारतीय समाज जे ० सा०इ० पू० = जैन साहित्य का इतिहास : पूवंपीठिका जे° सा० व° इ० जैन साहित्य का बृहद्‌ इतिहासडा० जे ० > डॉक्ट्रिन ऑफ दी जैन्सतके सं ० --तर्कसंग्रहत० सू० = तत्वार्थसूत्रद० उ० = दशवेकालिक तथा उत्तराधष्ययन (आचार्य तुलसी) ¶० = पृष्ठपरि० = परिशिष्ट




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