शिवगीता | Shivgeeta
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
270
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)भाषाधीैकाजमत । ( १५)इसी प्रकार ज्ञानवान् आह्मण देवताओंकों दुःखदाताही दे
कारण कि. वह कम नहीं करता इस कारण इसके विषय भाया पुत्रा.
दिमे प्रवेश करके देवता নিল হব ॥ १९ ॥ননী ने जायते यक्तिः शिव स्यापि देहिन: ।
वस्माइविंदर्षा नेव जायते शूरूपाणिवः ই)
' इससे किसी देहघारीकी झशिवमें भक्ति नहीं होती इस कारण
मूषको हिवका प्रसाद महीं मिक्ता ४ १३६॥
यथाकथंचितललातापि मध्ये विच्छिद्यते ठणास् ॥
জারী दापि शिवज्ञानं न নিশা भजत्यलूम् १४
और जो यथाकथथित् जानतामी है वह किसी कारण मध्य
मेंही खंडित हो जाता है भौर जो किसीको ज्ञाव हुलाभी तो
षृ विशरास्तसे महीं मजता ॥ १६॥
লন জন্ুঃ |येवं देवता विजश्नमाचरन्ति तबूभताम् ॥
पौरुषं तत्र कस्यास्ति येन मुक्तिभविष्यति १५॥|ऋषि बोले जब इस प्रकारसे देवता शरीप्थारियोंको নিম্ন
एतेः सो फिर इसमे किपका परक्रम है जो मैक्तिको
प्राप्त होगा | १५ ॥
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