श्री साधन - संकेत | Shri Sadhan Sanket
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
345 KB
कुल पष्ठ :
36
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)1 १३ 3स्वच्छुरीरात्मवहरेन्मु जादियेपीडा चैयेंग ।
पिदा तै विद्रादुुकममृतामिति ध (क्ठोपीपत् )
अर्थे--उम (श्रात्मा) को अपने शरीर से धैये ये साथअलग फ्र,--मैसे मू जसे मींए अलग री जाती है। उसी को
अविनाशी श्रमर जानी। दति ।ग्रह कैसे किया जाता है, उसके लिये विधि भी बताते ह--यब्देशाइमनगी प्राश्लथच्देज्हानयात्मी ।शानमाधत्मर्नि मद॒ति नियच्छेत्ततरच्छेच्छान्त झा मति ।श्तिष्टौ আসর प्राष्पष बरातिग्रेधत्॥ (क्टोपनिपत् )अथ--युद्धिमान् वाऊ ( पांचों ज्ञानन्द्रियों ) को मन म ले
सवि, मन को युद्धि म, वुद्धियो मन् मर और उसको शान्तआत्मा म ले जाव। उठो, लागो और श्रेष्ठ क्ों वा प्राप्न
करके उसे जानो ।(र) गुरुनऋपा
इस योग थी प्राप्ति केसे द्वानी ६? योगशिः्पोपनिषद् म
रियजी अश्नाजी से “নে ই.
पर्चात्युश्यत्त লন মিলা भद्द सँगतिम् |
বন रिद्धस्प कृपया वेगौ मवि नार्या ॥
५ अर्य-(जम अन्मान्वर के) परचान् पुएय ये भ्रमाव सेभिद पै साय स होता है, तथ मिद्ध ग छपा से योगी होता
है, काया नही | _
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