रश्मिरथी | Rashmirathi

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Book Image : रश्मिरथी - Rashmirathi

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

रामधारी सिंह 'दिनकर' ' (23 सितम्‍बर 1908- 24 अप्रैल 1974) हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं।

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्रथम सर्ग .जलद॒-पटल में छिपा किन्तु रवि कबतक रह सकता है ? युग की अवहेलना शूरमा कबतक सह सकता है? पाकर समय एक दिन थझाखिर उठी जवानी जाग फूट पढ़ी सबके समक्ष पौरुष की. पहली. थछाग। रंग-भूमि में जन था जब समाँ झनोखा बाँध बढ़ा. भीड़-भीतर से सहसा कण शरासन साधे | कहता हुआ तालियों से क्या रहा गवं में फल ? झंजन तेरा सुयश अभी क्षण में होता है धूल | तूने जो-जो किया उसे मैं भी दिखला सकता हूँ चाहे तो कुछ नई कलाएँ भी सिखला सकता हूँ। ाँले खोलकर देख कण के हाथों का. व्यापार ले सस्ता सुयश प्राप्त कर उस नर को धिक्कार। इस प्रकार कह लगा. दिखाने क्णं कल्ाएँ रण की सभा स्तब्घ रह गई गई रह आँख टेंगी जन-जन की ।. मंत्र-मुग्घ-सा मौन. चतुर्दिकू जन का... पारावार गूँज हे रही थी सिफ कण की धघन्वा को टंकार। फिरा कण त्यों साधु-साधु कह उठे सकल नर-नारी . राजवंश के नेताओं पर. पढ़ी. मुसीबत भारी। . . द्रोणु भीष्म अर्जुन सब फीके सब हो रहे उदास एक सुयोधन . बढ़ा बोलते. हुए - बीर शाबाश 1...




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