मनुस्मृति | Manu Smriti

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8.19 MB
कुल पष्ठ :
592
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)प्रथमोडध्या यः श्र( ४० १ फल-फूल वाले जो पकने पर नाश होते हैं, श्लौपय
कहलाते हैं। जिनमें फूल नहीं लगता, केवल फल हो लगता है
उन्हें वनस्पति कहते हैं। जिनमें फल-फूल दोनों लगते हैं, उन्हें
चुद कहते हैं|गुच्छं सुल्म हु विविध तय चणुजञातय: ।
बीजकारडरुदारयेव प्रताना बल्न्य एवं च ८0( छन ) गुर छ और _गुल्म 4 बहुत प्रकार के होते हैं
और दूश कोई तो बीज लगाने से होते हैं, कोई शाखा लगाने से
होते हैं जौसे प्रताना >६ वह्जी 'यादि 1तमसा बहुरूपेण बेष्टिता: कम हेतुना ।
झन्तः संज्ञा भवन्त्येते सुखदुखसमन्विता। ॥४8॥(४६) इस सब में तमोशुण की अधिकता है, 'झतएवसुख-दु्ख का ज्ञान भीतर ही रहता दै |
एतदन्तास्तु गतयो श्रह्मायाः समुदाहताः 1
घोरेजरिमतुभूतसंसारे निव्य' सततयापिनी ॥॥४०॥।(४० ) इस नाशवान् संसार में ब्रह्मा से चींटी पर्य्यन्त
नौवों की जो द्शा दे बह हमने आप लोगों से वर्णन कर दी ।एवं सब स सुप्ट्येद मां चाचिन्यपराक्रम ।श्रापमत्पन्तदंधे भूयः काले कालेन पीडयद् ॥४१॥।(४५१) इस प्रकार श्रह्माजी श्रचिन्त्य पराक्रमी सुककोजिनमें जड़ तता से निरुलदी दै और शाखा चड़ी नहीं होती |
न-जिनमें जद एक दै परन्तु रेशे (जड़ के डोरे) बहुत निकलते हैं । ,
.>९ जिनमें सोत होता दै. यथा लौकी, कुम्ददा आदि. !
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