मूंडै बोले रेतडली | Moonde Bole Retarli
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
148
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)मूंडे लाकां पड़ती दीसे, आंसू नाखें गावड़ली।
तावड़िये में भटका खाती, जीव छोड दे भेंसड़ली | 631
भूखी तीसी धूछ भरोड़ी, काम करे दिन रातड़ली।
टाबरिया नै धरां छोड़ दा, रोतां डुसका हिंचकड़ली । 641
टाबरिया गरक्ावे! भूखा, मांस चाटले आंतड़ली |
रोता-रोतां हिचक्यां बंधगी, आंसू सूक्या आंखड़ली | 651
गोद्यां में ठाबरिया बिलखें, मावड़ बिलखे रोटड़ली ।
बबल गुम-सुम बण उभौ है, ना निसेर ह बोलडलौ । 66 ।
फाटी कुंडती हाथ कटोरौ, लीरम-ली राः चूदंडली 1
सुध-बुध भूली घर-घर मगि, हाथ फैलाय मरवणली । 671
पेट भूख है लूवां चाल, आंष्यां फिरभी रातड़ली ।
तनड़ो सूक्यों मनड़ो बुझियौ, हाडथां चिपगी चामड़ली । 68 ।
कुटम-कबीलौ मूंडो मोड़, भगदड़ मचजा गांवड़ली ।
पकड़ काछ्जों सांसर* ऊभा, हेला देवे मौतड़ली | 69।
भूखा मरता जाजै भाजै, टकर खावै भीतड़लो 1
तिरवाना आस्यां म आवै चक्कर लावे साथङ्ली । 70 ।
घर मे सुत्या टाबर छोडचा, रात बिरात्तां गोरडली ।
भूखां मरती कांकड़” छोडे, बाबल साथे मावड़ली | 71 |
आंप-बांण ने छोड्चां छिटक्यां, मंगतो मांगे रोटड़ली ।
भूखां मरतो दिनड़ो काटे, रोबे आखी रातड़ली | 721
हाथ पगां सूं दिखें अडोछो5५, काजछ सूनी आंखड़ ली ।
मसूडा रा बाढा बहवे, ड्सक॑ रोदे कॉमणली।73।
1. हृदय विद्रक रोना 2. चुप-चाप 3. तार-तार 4. जानवर
5. गांव की अन्तिम सीमा 6. श्ुंगार-आभूषण विहीन
मूंडे बोले रेतड़ली 15
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