काशी विद्या सुधानिधि | Kashi Vidhya Sudhanidhi

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Kashi Vidhya Sudhanidhi by अज्ञात - Unknown
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 50.93 MB
कुल पृष्ठ : 665
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अज्ञात - Unknown

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फसवललपरस १४ भ्रोभाष्य प्रध्ा | घाा ये हवा वयय पं यवपाागा ला चना ठी० तद्ेतदि लि न विलत्तपात्वादित्या दिस जे रेप सुचा ां पेन रुत्यामाशदुसाह ऋत्र सुष्टों लि बस्तुवियाध -अधेसाप्रध्येविराध अच । बाक्यतक्गा धेंनिप्सापें स्सत्र त्वाजिमा निकच्याप्त्याभा सनिघन्ध नबाइ्यतकेति- मशतन्रिरासमुखें गा येनिप्काष इति मिटेत्ययं । एवं सत््वादिमयस्येद-शब्द | बाच्यस्थ कार णत्व न्तदु मम ममेकविज्ञानेव सवेधिज्ञानप्रतिज्ञान च परिहूत भवति | अथ पंराक्त हेत्व सरमनुवदति यत्त क्प्तितति । तस्यानृपप कत्व- माह तदसदि लि कंयमित्यचाद हेत्वतुपादान दिलि वक्तालुमा न- बिवत्ताइस्ति चेत सच प्रधानावपवा रेतुरवश्यापादेय तदभावात सदि- घततेति भाव । प्रतिज्ञादूप्टा न्ताम्यां हेत्वातेपे 10 प्ययुक्त दृत्यार येनाशत - मिति अनन्यथासिद्धू ह्यात्तेपक सर्वे प्रमाणसा धारणत्वात्यतिज्ञाइन्यथा सि देति मिट कत्वां दूष्टान्तस्थ देत्वासेपकत्वायाग उच्यते न केवल व्याप्त प्रदशेनायेव दु ट्रान्सा पन्दा घः अपि त्वसम्भवव्यादत्तिप्रदर्शना घेसपि सम्भव तोत्यन्यधासिद्त्वातु सर नालेपत्र दत्यथे । ब् सदीत्मना तदसम्भवं मन्वानस्थ तत्सम्भवमाचप्रदशनाय ह् हष्टान्तापादानम ईक्षत्यादिश्रवणाढ़ेव ्नुमानगन्था- भाव वगत । अयथ स्या न्न चेतनगतं म॒ख्यमी च्षणमिक्टे च्यते चअपि तु प्रधानगतं गोणमोक्षणस तत्तज ऐक्षत गला आप ऐकज्ञन्त ति गोऐचणसाचच्यात । ठो० सबात्मना तदपम्भव समिति एकबिजानेन सवविज्ञान घम्म- क्यादेकाफार च्यघादू बस्त्वन्तरव्यतिरेकराद्वा सम्भवति घटपटा दिए शिघ- पि तन सम्भघति घटपटादिष धंमेंक्यस्थान्वयेना न्यस्मादू व्यतिरकण वा समानाक्रारयागस्थ चामावादिति माव । अस्तु दूष्टान्तस्थानुमा नाहूत्स सम्भ बप्रदर्शनाधेत्व च साधघारयय तथा सत्यस्मन्मतेडपि सम्भव पात्तिक्रः स्पादि- त्यत्ाह इ्तत्यादी लि । आदि-शब्देन बच्यमाशरहेतवाविवत्तिता प्रति- ज्ञादुष्टान्तया सा घारस्पना नुमा नत्व शड्स्तिम इंत्तणा दासा धारणडे तुसद्वा- बाबाच्छडू5पि निरस्तेत्यभिप्रायेशाक्तमनुमानगन्धाभाव इति । उत्तरसत्र विकार लकाय्ेडडककिय दिए. उलललविपैलियीिकट.. फैकनलिल.. लयापिकजिकललयाप-कयकिफफलनयरसपिलविक. लिन... दे. ककन परलयाकरका केक कण. .ादयाथद य कयवोर दल ्ी पयकककपकध्मक पा या नाना का या व वि व व हे. लिन वन जन कक नया जाउनललरकिडलनननजयनय ज ं ललवलतगिवससतलतटतध हाथ




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