जिन खोजा तिन पाइयां | Jin Khoja Tin Paaiyan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
20 MB
कुल पष्ठ :
579
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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२०.
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२९.३०३१.
३२.भ्रधोगामी यौन-शक्ति भौर ऊध्वंगामी कुण्डलिनी-शक्तिश्वास को धीमा करे से क्रोध व कामोतेजना आदि की शान्तितीव्र श्वास की बोट से सोयी कुष्डलिनी-शक्ति का जागरण
जागी हुई कुण्डलिनी का चक्री को सक्रिय करनाव्यक्तित्व के सुप्त केन्द्रों का सक्रिय होनासक्रिय केन्द्रों से नये व्यक्तित्व का झाविर्भावविपरीत लिंगी नग्न शरीर की कल्पना से यौन-केन्द्र सक्रियमैं कौन हूँ?” की चोट--यूरे व्यक्तित्व के मौलिक भाधार पर. तीज्न श्वास से शरीरगत चोट भौर मैं कौन हूँ ?” से मनोगत चोट
. शक्तिपात मे तीसरी दिशासे चोट. में कौन हूँ ?” की चोट के लिए विशेष स्थिति आवश्यक
कुण्डलिनी-पथ पर अनेक जन्मों व योनियो के प्रनुभवों काप्रकटीकरणরর के प्ात्रा-पथ पर समस्त जीवन-विकास का इतिहास
ंकुण्डलिनी-विकास में भ्रनेक भ्रतीन्द्रिय भ्रनुभनकुछ पशु-पक्षियों की भ्रतीन्द्रिय क्षमताशक्तिपात में ऊर्जा का नियन्त्रित भ्रवतरण
कुण्डलिनी-उत्थान श्रौर शक्तिपात पर अ्रनुभवशक्तिपात से स्वयं में ही छिपी हुई ऊर्जा-क्षमता का विकास
शक्तिपात में से भन्तर्यान्ना मे प्रोत्साहनसामूहिक शक्तिपात भी सम्भवशक्तिपात का प्रभाव धीरे-धीरे क्षीण होना सम्भव
भ्राध्यात्मिक विकास-क्रमं मे पीछे लौटना भसम्भव
शक्तिपात व प्रभु-कृपा ( ग्रेस ) में भ्रन्तरभ्रहंशून्य स्थिति में शक्तिपात की भायोजना कंसे सम्भव ?
श्रहं-शून्यता क्रमिकं नहींअहं-शून्य व्यक्ति पर हमेशा प्रभु-कृपा की वर्षा
अहं-शून्यता पर ही प्रभु-कृपा (ग्रेस ) उपलब्धमनोगत (साइकिक ) क्रुण्डलिनी-ऊर्जा की यात्रा परमात्मा तक
सीधे शान्त-ध्यान भौर कुण्डलिनी-जागशरण से ध्यान के बीच
चुनावसभी शक्ति-साधनाएँ--तनाव की साधनाएँ हैंबुद्ध और कुण्डलिनी-साधना~ चौदह ~१४५१
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