अमृत | Amrit
श्रेणी : साहित्य / Literature

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Add Infomation AboutLakshmi Shankar Mishr
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
101
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)अधि:
१८५४ননतुक्षिकए ढेहर काम काने बढ़ा | उसका खासा-यीना छूट
गया । तम-चदय हा दास ने रहा | दित-रात बस जाम करता
धा} एक संदीता पूरा दो उहा था। {नच सुधाकर् उक्षन् राक्र
कर लिया । নিয়ন दिस पर राजकमारी आई। चित्र देग्वा,
फिर सापसंद् ।নই জাতজ से चित्रकार ने पृथ्ठा--গন কথা কী হা इसमे १?राजझुमारी ने उत्तर दिया--#तुप्र तो कल्ाकार ही, इतना भी नहीं जान सकते ९? +
“आप ही बताएं, आभारों हुगा 1”इसमें सजीवता नदी | इसका रंग असपतली-जेसा नहीं लगता)गालो पर स्वाभाविक गुलाबी रंग होना चाहिए 1” |
चित्रक्तार सोच में पड़ गया ।राजकुमारी ने कहा--“জী बात तुम्हारे पहले चित्र में थी; वह इसमें नहीं । यह
` चिच मुभे जचा नरह ४”चिन्रक।र बोला-“तो एक बार फिर अवसर दीजिए, ओर प्रय कष गा 1
राजकुमारी ने एक महीने बाद आते का वादा किया, ओर
चली गई।चित्रकार का सन चंचल हो उठा । क्या -करंनांचाहिए ?
ग्राहक हाथ से निकला जा रहांथा | सारी आंशाओं पर पानी
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