कल्किपूराण | Kalkipuran

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अंलुक्माणेकी । विषय, ঘা, वार्णीप्ते सूवाने पद्मावत्तीके साथ सम्बाद करना अ दति षष्ठोऽध्यायः । सतदयाध्याय | सूवाने पद्मावतीकी ग्रशंत्ता करना आर पद्मकतीने स्वाधिकृत विप्णुका अर्चन वंदन ध्यान सूवाके प्रति कहना ००५ ৯৫5 ०००० ,,,, ६२९ इति सप्तमोऽध्यायः | (1৮৮৮ পথ নাওহদান2। पद्मवर्तीके ग्रति सूत्राका हरिर्क साङ्ग पजाविषयक प्रश्न... ««« ८९ पद्रावत्तीको सूवाफ प्रति ध्याने चितनीय हका रूप कहना आर सूवाका आदर करना ««« <॥ सवाके कहेहुए' कल्किजीके गुण श्रवण करके कामातुर हुई पद्मावतीने सवाके मुखद्वारा विवाहके छिये काल्किजीकी ` प्राथना कलना „० ० ८७ भगवान्‌ क्िजीकी' सवके सुख स्वयंवरका वृत्तांत जानना और घ)डेपर्‌ सवार्‌ हो ह्वाको साथ लेकर सिहर पं जाना ,,,, ८९ मणिकांवनसे देदीप्यमान सिंहल- हीपमें कल्किजीकों फारुमती पुराकी शोभाका देखना और सानादिकि लिये सरोवरम ठहरना और स़वाने पद्मावतीकों भगवानके आनेका संदेशा भेज- नेकी प्रार्थना करना .... «»«» ९९ द्डाति प्रथमो5ध्यायः हताय5्ष्यायृ: सरोवरके सभीप जल छानेके मार्गमें | ^ ् রাডার বা, (4৬) विषय, पष्ठक स्थित भगवान्‌ कल्किजीने पद्मा- নীল पाक्त सूष्को सेजना «« ९ सूवेका पतद्मावतीके पास जाना और सम्वाद होना ১১১০ তির जल्क्रीडाके मिपसे काल्किजीके देख- नेक सखियों सहित प्द्यावत्तीका सरोखमें आना. ««« 2০ তি जढविहार करके कामसंतप्त हुईं पद्मावर्तकों कद॒म्बके वृक्ष नीचे सोते हुए कल्कि भगवान्‌का दुशन करना ^ ৪75 ও स्वयं जागे हुए भगवान्‌ करिकजीकों पद्मावतीका सोन्दर्य वर्णन करना «७७७ क न्नः «९ ९< इति द्वितीयो<ध्यायः तुताय{ष्यायः । पद्यावतीका कर्िजीकौ स्तुति करना जर काल्कजीकी साज्ञासे घर आकर दूत द्वारा कल्कि- जीका आगमन पिताको निवेदन करना রা पद्मावतीका विवाहके অর নুইল্থ राजाका कल्किजीकों अपन घर ठाना सीर पद्यादतीका विवाह , करना ^ *७ , ५९१ स्रीभावको प्रप्त हुए राजाभोके कल्किजीके दुशेनोंसे पुरुष भाव हीना ^ «०० ५ ०९७५ 2) पुरुषमावकी प्राप्त इए रानाञंको मत्स्य आदि दुशावतार रूपेसे कल्किजीकी स्तुति करना .... ९०४ इंते ततायाइध्याय:ः | चतुथा5प्याय | राजाओंकी स्तुतिसे अपत्न हुए कल्किजीकों राजाओंके प्रति « चार वर्णके धर्मोका उपदेश करना ०००१ ९, १६ 790७ १००




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