गांधी मानस | Gandhi Manas

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Gandhi Manas by जयनारायण व्यास - Jaynarayan Vyas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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© शरीसन्महागणधिपतये नमः छथ सित शुम शैलजा-सुत्त, शव -पुगभे, श्री सौख्यदाता विधुरू विश्वज विध्वहर, बृर--- पद, व्यापक विधि-विधाता । “ऊन कहाऊं में न यह दूवाग्र | किलर की हुराशा, किंतु कवि-पद-कप्त्ष-रज हो-.. सर तरक, यह हयै पिपासा | ১৯১১০




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