प्यारे बापू (स्वराज्य की ओर) | Pyare Bapu (Swarajya Ki Or)
श्रेणी : इतिहास / History

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
80
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)सराज्य की और 2६
कायरों का अन्हे | बल्वानांक्रा चतो अहिंसा और
प्रेम ही है |!
>त समय जरूर भूल हो गयी थी ।
गांधीजी १
<०,० ०,००० दिन्दुस्तानियों का का
आजादी के नाम से मरने के लिए ढडाई म॒ तान दिया |
विद्ययत का শালা
लेकिन ज्यों ही लड़ाई खतम हुई, विटन अपने बचतों
को भूल गया । उसने कहा
हम आप लोगों को आजादी
दा नही देना चाहते ।
आप छांगों की आवादी ३५ « ०
!?०,००० है और आप
लांग हमारा ही काम करते हैं । हम आपकी आजादी जादी देन
क! ववङकफी क्यों करं १५
पुनकर हिन्दुस्तान कोप
अव हम ब्रिटेन से ही
वीखा दिवा । हमारी सन्तान
4 उटा | लोग कहने ठन
डड़ाई लड़ेंगे। उसने हमें
व्यथ मं बलिदान दई
12108 फाजय |
नाह्षण-दरिजन ष्क हा
ट्कर् एक बड़ी लड़ाई की तयारी
User Reviews
No Reviews | Add Yours...